भिवानी के बहुचर्चित मनीषा मौत मामले में सीबीआई जांच की धीमी गति से नाराज मृतका के पिता संजय कुमार ने 29 जून से जिला उपायुक्त कार्यालय के बाहर आमरण अनशन पर बैठने का फैसला किया है।

भिवानी। जिले का बहुचर्चित मनीषा मौत मामला एक बार फिर गरमा गया है। मृतका के पिता संजय कुमार ने सीबीआई जांच में देरी से नाराज होकर आगामी 29 जून से लघु सचिवालय (डीसी ऑफिस) के बाहर आमरण अनशन पर बैठने का बड़ा फैसला किया है। इस संबंध में सोमवार को वे जिला उपायुक्त से मिलकर अनशन की आधिकारिक अनुमति लेने पहुंचे थे, लेकिन डीसी की अनुपस्थिति के कारण उन्होंने उनके पीए को अपना मांग पत्र सौंपा। ढाणी लक्ष्मण गांव की 19 वर्षीय मनीषा पिछले साल 11 अगस्त को लापता हुई थी, जिसके बाद इस पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया था। पिता का कहना है कि वे हर हाल में न्याय के लिए अकेले ही अनशन पर बैठेंगे।

मनीषा मौत मामले का पूरा सच

बता दें कि बीते वर्ष 11 अगस्त को लापता हुई मनीषा का शव दो दिनों के बाद यानी 13 अगस्त को गांव के ही खेतों में संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ था। मृतका के परिजनों ने शुरू से ही उसकी हत्या की आशंका जताई थी और स्थानीय पुलिस पर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए थे। पुलिस की ढुलमुल कार्रवाई से नाराज परिजनों ने शव लेने से साफ मना कर दिया था, जिसके बाद यह मामला काफी ज्यादा बढ़ गया था। जनाक्रोश को देखते हुए तत्कालीन सरकार ने लोहारू थाने के समस्त स्टाफ को निलंबित कर दिया था और जिले के एसपी का भी तबादला कर दिया गया था।

सीबीआई जांच की धीमी रफ्तार

मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी थी, जिसके बाद 21 अगस्त को परिजनों ने मनीषा का अंतिम संस्कार किया था। हालांकि, केस सीबीआई के पास जाने के 10 महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ सका है। केंद्रीय एजेंसी की टीम ने कई बार गांव का दौरा कर संदिग्धों से पूछताछ अवश्य की है, परंतु अभी तक न तो किसी की गिरफ्तारी हुई है और न ही मामले का पटाक्षेप हुआ है। इसी ढीली कार्रवाई के विरोध में पीड़ित पिता ने अब आंदोलन का रास्ता चुना है।

पिता ने दोहराया हत्या का दावा

मीडिया से बातचीत करते हुए मृतका के पिता संजय कुमार ने स्पष्ट किया कि उन्हें प्रशासन से अनुमति मिले या न मिले, वे अपने फैसले पर अडिग हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई सामाजिक आयोजन नहीं है, इसलिए उन्होंने किसी को आने का निमंत्रण नहीं दिया है, वे अकेले ही इस लड़ाई को लड़ेंगे। पिता ने पुलिसिया दावों को खारिज करते हुए दृढ़ता से दोहराया कि उनकी बेटी ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उसकी बेरहमी से हत्या की गई थी। उन्होंने सरकार और सीबीआई से सवाल किया कि आखिर 10 महीनों में जांच कहां तक पहुंची, इसका खुलासा सार्वजनिक किया जाए।