कुंदन कुमार/ पटना। भोजपुर जिले में एक कथित पुलिस एनकाउंटर का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता अश्विनी कुमार चौबे ने इस पूरी घटना को लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला और हत्या करार दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

​क्या है पूरा मामला?

​भोजपुर जिले के शाहपुर स्थित बिलौटी निवासी भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर यह विवाद शुरू हुआ है। अश्विनी चौबे का आरोप है कि भरत भूषण तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, जिसके स्पष्ट साक्ष्य सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के रूप में मौजूद हैं। उनका दावा है कि पुलिस कस्टडी में होने के बावजूद भरत की गोली मारकर हत्या कर दी गई। चौबे ने इस घटना को न्याय व्यवस्था पर एक काला धब्बा बताया है।

​अमित शाह से हस्तक्षेप की अपील

​अश्विनी चौबे ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट कर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने का आग्रह किया है। उन्होंने मांग की है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच बिठाई जाए। उनका तर्क है कि यदि इस तरह की घटनाओं पर लगाम नहीं लगाई गई, तो समाज में कानून-व्यवस्था को लेकर गलत संदेश जाएगा।

​बिहार सरकार से ‘सुशासन’ का सवाल

​इतना ही नहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि अगले 48 घंटों के भीतर हत्यारे पुलिसकर्मियों को चिन्हित कर जेल भेजा जाए। चौबे ने कड़े शब्दों में कहा कि युवाओं को अपराधीकरण से बचाना सरकार का परम कर्तव्य है। किसी मां की गोद से उसके बच्चे को इस तरह छीन लेना न केवल अमानवीय है बल्कि यह सरकार की प्रशासनिक विफलता और पुलिस की विद्वेषपूर्ण मानसिकता को भी दर्शाता है।

​अश्विनी चौबे ने स्पष्ट किया है कि कानून के राज में एनकाउंटर के नाम पर हत्या को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि आरोपी ने आत्मसमर्पण किया था तो उसे हिरासत में लेकर न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा मिलनी चाहिए थी। पुलिस द्वारा सीधे गोली मार देना न्याय नहीं बल्कि अराजकता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सख्त कदम उठाए जाने अनिवार्य हैं।