संजय पाटीदार, भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) से भ्रष्टाचार और वित्तीय विसंगतियों की एक ऐसी खौफनाक इनसाइड स्टोरी सामने आई है, जिसने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया है। भोपाल एम्स में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों समेत कई जीवनरक्षक दवाओं की खरीदी में नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर करोड़ों रुपये का वारा-न्यारा करने के गंभीर आरोप लगे हैं। जो दवाएं देश के अन्य राज्यों और दूसरे एम्स को कौड़ियों के दाम मिल रही है वही दवाएं भोपाल एम्स ने 7 गुना तक महंगी कीमतों पर खरीदी है।

इस महा-घोटाले की गूंज के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय विशेष जांच टीम ने भोपाल एम्स में डेरा डाल दिया है। वहीं इस खुलासे के बाद मध्य प्रदेश की सियासत में भी भीषण घमासान छिड़ गया है।

‘इमरजेंसी’ के नाम पर महा-खेल: 15 लाख का बजट कैसे बना 60 करोड़?

अस्पताल के अंदरूनी सूत्रों और दस्तावेजों के मुताबिक एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में दवाओं की खरीदी हमेशा खुली निविदा के जरिए होनी अनिवार्य है ताकि कीमतें नियंत्रित रहें और पारदर्शिता बनी रहे। नियमों के तहत एम्स प्रशासन केवल बेहद आपातकालीन स्थिति में ही ‘अमृत फार्मेसी’ से सीधे दवाएं खरीद सकता है।

बजट का जादुई उछाल

चौंकाने वाला तथ्य यह है कि भोपाल एम्स में पहले यह डायरेक्ट इमरजेंसी खरीदी महज 10 से 15 लाख रुपये सालाना होती थी। कोरोना काल का फायदा उठाकर आपात स्थिति का हवाला देते हुए इसे बढ़ाकर 2 से 3 करोड़ रुपये किया गया। असली खेल कोविड खत्म होने के बाद शुरू हुआ। कोरोना थमा मगर सीधी खरीदी का यह आंकड़ा थमने के बजाय रॉकेट की तरह 25 करोड़ से सीधे 60 करोड़ रुपये सालाना पार कर गया। चौंकाने वाली बात यह है कि भोपाल एम्स देश का इकलौता ऐसा एम्स बन गया है, जहां पिछले 3-4 सालों से दवाओं के नियमित टेंडर ही नहीं किए गए, ताकि यह सीधी खरीदी का खेल चलता रहे!

मरीजों की जेब पर सरेआम डाका, भोपाल और अन्य राज्यों में कीमत

इनसाइड रिपोर्ट्स से सामने आए ये आंकड़े यह बताने के लिए काफी हैं कि किस तरह जनता के पैसे और लाचार मरीजों की जेब काटी गई है:

दवा का नाम और डोजभोपाल AIIMS की कीमतरायपुर AIIMS की कीमतजोधपुर AIIMS की कीमतMP सरकार की खरीद कीमत
इंजेक्शन जेमसिटाबिन (कैंसर दवा – 1 ग्राम)₹ 2,100₹ 425₹ 475₹ 357
टैबलेट इमेटिनिब (400 मि.ग्रा.)₹ 600₹ 138₹ 168₹ 90
इंजेक्शन इनोक्सापेरिन (40 मि.ग्रा.)₹ 262.80₹ 123₹ 110₹ 88
इनोक्सापेरिन (60 मि.ग्रा.)₹ 309.60₹ 149.87₹ 120₹ 132
टैबलेट गैफिटिनिब (250 मि.ग्रा.)₹ 540

भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने खोला मोर्चा, बंद कमरे में 4 घंटे खिंचाई

इस पूरे नेक्सस का भंडाफोड़ तब हुआ जब भोपाल के भाजपा सांसद आलोक शर्मा ने एफएफसी (FFC) की बैठक में इस मुद्दे को पूरी प्रखरता से उठाया। सांसद ने अलग-अलग राज्यों से दवाओं की कीमतों का पुख्ता डेटा जुटाकर सीधे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रमुख सचिव को सौंप दिया। पिछले 6 महीनों में मंत्रालय को इस संबंध में 8 से 10 बेहद गंभीर शिकायतें मिली थीं।

इन पुख्ता सबूतों के आधार पर 18 जून गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एक विजिलेंस और तकनीकी जांच टीम अचानक भोपाल एम्स धमक पड़ी। जांच टीम ने संस्थान के डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन (DDA) और प्रेसिडेंट को एक बंद कमरे में बिठाकर करीब 4 घंटे तक कड़ी पूछताछ की। इस दौरान दवाओं की खरीद, स्टॉक रजिस्टर और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई अहम और गोपनीय दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।

कांग्रेस का तीखा वार: ‘कैंसर पीड़ितों के हक की खुली लूट’

विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा, “एक तरफ सरकार ‘अमृतकाल’ का ढोल पीटती है, और दूसरी तरफ देश में जो कैंसर की दवा 400 रुपये में मिल रही है, उसे भोपाल एम्स में 2100 रुपये में खरीदा जा रहा है। यह सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसे और लाचार कैंसर मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है। इस संगठित भ्रष्टाचार के कारण गरीब मरीजों को समय पर दवाएं तक नसीब नहीं हो पा रही हैं।”

भाजपा का पलटवार: ‘भ्रष्टाचारियों की खैर नहीं, पाई-पाई वसूलेंगे’

वहीं, सत्तारूढ़ भाजपा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि हमारी सरकार की नीति भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की है। जैसे ही यह विसंगति सामने आई, सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया और दिल्ली से जांच दल भेज दिया। इस खेल में जो भी रसूखदार या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उस पर न केवल सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी, बल्कि जनता के नुकसान की पाई-पाई उसी अधिकारी की संपत्ति से वसूल की जाएगी।

अब आगे क्या?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की इस औचक कार्रवाई से भोपाल एम्स के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप और सन्नाटा पसरा हुआ है। सूत्र बताते हैं कि शुरुआती जांच में ही कई चौंकाने वाली गड़बड़ियां पकड़ी जा चुकी हैं। जैसे ही यह विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय मंत्री के पास टेबल होगी, भोपाल एम्स के कई बड़े और रसूखदार चेहरों पर गाज गिरना और निलंबन के साथ जेल जाना लगभग तय माना जा रहा है।
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