शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार अपने करीब 20 हजार सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एक बड़ी सौगात देने की तैयारी कर रही है। पदोन्नति प्रक्रिया में हुई तकनीकी चूक के कारण 30 जून को रिटायर हुए जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम अंतिम आदेश में छूट गए थे, उन्हें अब ‘प्रोफार्मा प्रमोशन’ देकर उनकी पेंशन में इजाफा किया जाएगा।
मंत्रालय स्तर पर इसको लेकर कवायद शुरू हो गई है। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में 14 कर्मचारियों के प्रकरणों पर विशेष चर्चा हुई, जिसके बाद सरकार ने आगामी विभागीय पदोन्नति समितियों के जरिए पात्र कर्मचारियों को लाभ देने के निर्देश दिए हैं।
35-36 साल की निष्ठावान सेवा का मिलेगा सम्मान
दरअसल प्रदेश में 35 से 36 साल तक शासकीय सेवा देने के बाद 30 जून 2026 को बड़ी संख्या में कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए थे। पदोन्नति सूची में नाम न आने या प्रक्रिया में देरी होने के कारण इन्हें बिना प्रमोशन के ही रिटायर होना पड़ा, जिससे इन्हें प्रतिमाह पेंशन में आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा था।
सरकार द्वारा विभागीय स्तर पर प्रक्रिया शुरू करने के बाद अब इन 20 हजार रिटायर कर्मचारियों को मानसिक और आर्थिक राहत मिलेगी।
कैसे काम करेगा ‘प्रोफार्मा प्रमोशन’? जानिए गणित
प्रोफार्मा पदोन्नति मिलने से कर्मचारियों को वास्तविक या भौतिक रूप से पदोन्नत पद पर काम करने का अवसर तो नहीं मिलेगा, लेकिन पेंशन निर्धारण में उनके उच्च पद का वेतनमान जोड़ दिया जाएगा।
पदोन्नत पद के आधार पर कर्मचारी का एक काल्पनिक वेतन तय किया जाएगा, जिसके आधार पर उनकी पेंशन में बढ़ोतरी होगी।
इस व्यवस्था के तहत कर्मचारियों की पेंशन तो बढ़कर मिलेगी, लेकिन उन्हें पिछले समय का बकाया एरियर नहीं दिया जाएगा।
2026-27 की DPC में तय होगी पात्रता
राज्य सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि आगामी विभागीय पदोन्नति समितियों (DPC) में पात्रता तय करने की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाए। इसके लिए 2026-27 की DPC में वर्ष 2024-25 की स्थिति के अनुसार और वर्ष 2020-21 के रिक्त पदों को आधार बनाकर प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।
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