केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार पर निशाना साधते हुए 'देर आए, दुरुस्त आए' का तंज कसा है। हुड्डा ने कहा कि लगातार पेपर लीक से युवाओं का विश्वास उठ रहा है, इसलिए पूरी भर्ती और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी सुधार की जरूरत है।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। जहां विपक्षी दल इसे छात्रों और युवाओं के आंदोलन की जीत बता रहे हैं, वहीं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है। हुड्डा ने कहा कि सरकार को यह कदम पहले ही उठा लेना चाहिए था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “देर आए, दुरुस्त आए।”

हुड्डा ने कहा कि अगर BJP सरकार ने पहले ही कदम उठा लिया होता तो पूरे देश में पेपर लीक के कारण इतना नुकसान नहीं होता। लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों के चलते युवाओं का परीक्षाओं और पूरी भर्ती प्रक्रिया से विश्वास उठता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पूरे परीक्षा और भर्ती सिस्टम में बदलाव किया जाए। एक ऐसा नया और पारदर्शी सिस्टम तैयार किया जाना चाहिए, जिसमें युवाओं को यह भरोसा हो कि जो अभ्यर्थी जितना काबिल होगा, उसे उतने ही अंक मिलेंगे और चयन पूरी तरह योग्यता के आधार पर होगा।

‘रास्ता खुला है, संसद में होगी बहस’

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि अब रास्ता खुला है और संसद में इस मुद्दे पर बहस होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बहस के बाद पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली को लेकर कोई ठोस रास्ता जरूर निकलेगा।

हालांकि, उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पेपर लीक रोकने के लिए कानून पहले भी बनाए गए हैं, लेकिन आज तक कितने पेपर लीक करने वालों को सजा मिल पाई है? हुड्डा ने कहा कि केवल कानून बना देना काफी नहीं है, बल्कि उसका प्रभावी ढंग से लागू होना भी जरूरी है।

‘कठोर कानून बनाने की जरूरत’

हुड्डा ने कहा कि पेपर लीक करने वालों के खिलाफ बेहद कठोर कानून बनाने की जरूरत है, ताकि कोई भी व्यक्ति युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने से पहले कई बार सोचे। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लगातार पेपर लीक होने से सबसे ज्यादा नुकसान मेहनत करने वाले युवाओं का होता है। अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करते हैं, परीक्षा देते हैं और जब पेपर लीक हो जाता है तो उनकी सारी मेहनत बेकार चली जाती है। इससे युवाओं में व्यवस्था के प्रति निराशा और अविश्वास पैदा होता है।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद विपक्ष हमलावर

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी नेताओं ने इसे युवाओं के दबाव और आंदोलन का परिणाम बताया है। वहीं, हुड्डा के बयान ने इस पूरे मामले को हरियाणा की राजनीति से भी जोड़ दिया है।

हुड्डा ने सीधे तौर पर कहा कि सरकार को पहले ही कदम उठा लेना चाहिए था। अब जबकि इस्तीफा हो चुका है, उनके मुताबिक अगली चुनौती परीक्षा और भर्ती व्यवस्था में वास्तविक सुधार लाने की है।

उन्होंने साफ कहा कि युवाओं का भरोसा केवल बयानों से वापस नहीं आएगा। इसके लिए ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जहां परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों को जल्द और कड़ी सजा मिले।