पटना के मीठापुर स्थित कृषि भवन सभागार में सोमवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय विभागीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि खेत बचाओ, गुणवत्तायुक्त बीज और खाद सुलभ कराओ अभियान पूरी तरह से किसान हित में कृषि विभाग की प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रतीक है। इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य राज्यभर में उर्वरक बिक्री व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, सुव्यवस्थित, जवाबदेह और किसान-केंद्रित बनाना है, ताकि अन्नदाताओं को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

​तीन दिनों की वैधता वाला क्यूआर कोड सिस्टम

​किसानों की सुविधा और बिचौलियों की संलिप्तता को पूरी तरह खत्म करने के लिए सरकार ने एक नया और आधुनिक डिजिटल कदम उठाया है। कृषि मंत्री ने घोषणा की कि अब किसानों को उर्वरक खरीद के लिए एक विशेष क्यूआर कोड उपलब्ध कराया जाएगा। यह क्यूआर कोड तीन दिनों तक पूरी तरह मान्य रहेगा। इस तयशुदा अवधि के भीतर किसान इसके माध्यम से इसमें अंकित अधिकृत और वैध उर्वरक विक्रेता के पास जाकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत पारदर्शी तरीके से डिजिटल या अन्य माध्यमों से भुगतान कर आसानी से अपना उर्वरक खरीद सकेंगे।

​प्रभावी निगरानी और डिजिटल एकीकरण पर जोर

​किसानों को समय पर और सुगमता से गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराना कृषि विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शुमार है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि उर्वरक की उपलब्धता, सुचारू वितरण और पारदर्शी बिक्री व्यवस्था में प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। इस पूरी व्यवस्था को डिजिटल रूप देने के लिए विभाग ने एफएसएएस (उर्वरक बिक्री आवेदन प्रणाली का ढांचा) के माध्यम से एक उन्नत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किया है। इसके अलावा, आईएफएमएस (IFMS) और एग्रीस्टैक (AgriStack) जैसी आधुनिक डिजिटल प्रणालियों के एकीकरण से उर्वरक की खरीद-बिक्री की पूरी प्रक्रिया को बेहद सुव्यवस्थित, पारदर्शी और पारदर्शी बनाने का ठोस प्रयास किया गया है।

​कालाबाजारी और अनियमितताओं पर होगी कठोर कार्रवाई

​कार्यशाला के दौरान कृषि मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि निर्धारित मूल्य से अधिक दाम पर उर्वरक बेचने, कालाबाजारी करने, जमाखोरी करने या किसी भी प्रकार की अन्य अनियमितता की शिकायत मिलने पर तुरंत और कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि तकनीक का मूल उद्देश्य हमेशा से किसान की राह आसान बनाना और सुविधा बढ़ाना होना चाहिए, न कि उनकी परेशानी को बढ़ाना। किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक बाधा का समयबद्ध समाधान निकाला जाना चाहिए ताकि किसानों का भरोसा व्यवस्था पर और अधिक मजबूत हो सके।