पटना। बिहार की सियासत में ‘बड़े भाई’ की भूमिका में आई भाजपा अब पूरी तरह फ्रंट फुट पर खेल रही है। बंगाल चुनाव की सरगर्मी शांत होते ही बिहार में सम्राट सरकार के कैबिनेट विस्तार की सुगवाहट तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, 6 मई को नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हो सकता है। इस विस्तार में भाजपा के 13 और जदयू के 12 चेहरों को शामिल किए जाने की चर्चा है।
मंत्रियों का गणित और 15-15 का फॉर्मूला
कैबिनेट में सत्ता संतुलन बनाए रखने के लिए भाजपा और जदयू के बीच ’15-15′ का फॉर्मूला तय हुआ है। हालांकि, पहले चरण में सभी पद नहीं भरे जाएंगे। आगामी विस्तार में:
- भाजपा: 13 मंत्री
- जदयू: 12 मंत्री
- सहयोगी दल: लोजपा (रामविलास) से 2, जबकि हम (HAM) और रालोमो (RLM) से 1-1 मंत्री शपथ ले सकते हैं।
भाजपा के कोटे वाले मंत्रियों के नामों पर 1 मई तक अंतिम मुहर लगने की संभावना है।
दबदबे में भाजपा: सीएम, गृह और स्पीकर पद पर कब्जा
इस बार बिहार की सत्ता का केंद्र पूरी तरह बदल चुका है। 20 सालों तक बड़े भाई की भूमिका निभाने वाली जदयू को भाजपा ने ‘जोर का झटका धीरे से’ दिया है। नई व्यवस्था में मुख्यमंत्री की कुर्सी, विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) और सबसे शक्तिशाली गृह मंत्रालय भाजपा के पास ही रहेंगे। गृह मंत्री अमित शाह और जदयू नेतृत्व के बीच इस डील पर सहमति बन चुकी है। जदयू को इस बार डिप्टी सीएम पद से संतोष करना पड़ा है।
बंगाल चुनाव के नतीजों पर टिका है समारोह
शपथ ग्रहण की तारीख काफी हद तक बंगाल चुनाव के परिणामों पर निर्भर करेगी। यदि नतीजे भाजपा के पक्ष में रहते हैं, तो 6 मई को एक भव्य समारोह का आयोजन होगा। हालांकि, परिणाम उम्मीद के मुताबिक न रहने पर तारीख में बदलाव की गुंजाइश भी रखी गई है।
बदलेगा मंत्रालयों का प्रोफाइल
विस्तार के साथ ही विभागों के बंटवारे में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा। चर्चा है कि पॉवरफुल और भारी-भरकम पोर्टफोलियो भाजपा अपने पास रखेगी, जिससे शासन पर उसकी पकड़ और मजबूत हो सके। मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव के साफ संकेत मिल रहे हैं।
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