भोजपुर। बिहार के मुख्यमंत्री ने हालिया दौरों में अपराधियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कड़े तेवर दिखाए हैं। गयाजी और भोजपुर के अपने दौरों के दौरान उन्होंने न केवल कानून-व्यवस्था पर प्रहार किया बल्कि राज्य के औद्योगिक विकास के लिए नई आधारशिलाएं भी रखीं।
अपराधियों का गयाजी में पिंडदान: सख्त चेतावनी
भोजपुर और गयाजी में आयोजित जनसभाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अपराधियों को चेतावनी दी कि बिहार में अब उनका कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा बिहार के अपराधी डर के मारे अब बनारस की ओर भाग रहे हैं, जहां बाबा उन्हें ढूंढ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य के 80 से 90% अपराधी बिहार छोड़कर भाग चुके हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो बचे हुए अपराधी हैं, उनका पता बताएं और प्रशासन उनका इलाज करेगा। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि सुशासन तभी कायम होगा जब अपराधियों का गयाजी में पिंडदान हो रहा हो या वे जेल की सलाखों के पीछे हों। उन्होंने पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए कि अपराधियों की चुनौती का जवाब 48 घंटे के भीतर दिया जाए।
शिक्षा और उद्योग का नया मॉडल
अपराध के खिलाफ सख्त रवैये के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने राज्य में शिक्षा और उद्योग के पुनरुद्धार पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में मॉडल स्कूलों में ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि भविष्य में कोचिंग सेंटर्स की आवश्यकता ही न रहे। इसके साथ ही उन्होंने राज्य से बाहर रह रहे प्रवासियों से बिहार लौटने और उद्योग-धंधे स्थापित करने की अपील की।
अतरी विधानसभा के देवगांव में MSME द्वारा 170 करोड़ की लागत से बनने वाले ‘टेक्नोलॉजी सेंटर’ का शिलान्यास किया गया, जो बिहार के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भोजपुर में बाणासुर इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क का शिलान्यास
विकास यात्रा के अगले क्रम में, भोजपुर के कारीसाथ में 31.20 करोड़ रुपये की लागत से ‘बाणासुर इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क’ की नींव रखी गई। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 32 एकड़ में बनने वाला यह पार्क बिहार में मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा।
इस अत्याधुनिक पार्क में मछली प्रजनन केंद्र (कार्प हैचरी), आरएएस फिश फीड मिल, मछली स्वास्थ्य परीक्षण प्रयोगशालाएं और प्रशासनिक भवन जैसी 17 प्रमुख सुविधाएं होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना न केवल मत्स्य उत्पादन में वृद्धि करेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं और किसानों के लिए रोजगार और प्रशिक्षण के नए अवसर पैदा करेगी, जिससे ‘जलकृषि पर्यटन’ को भी बढ़ावा मिलेगा।

