कुंदन कुमार/पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों राज्य की आर्थिक स्थिति और सरकारी टैक्स को लेकर घमासान मचा हुआ है। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने राज्य की सम्राट सरकार (एनडीए सरकार) पर कड़ा प्रहार करते हुए प्रदेश के नागरिकों की बदहाली का मुद्दा उठाया है। उन्होंने सरकार द्वारा पंचायतों में लगाए जाने वाले हाउसिंग और मेंटेनेंस टैक्स को गरीबों पर सीधा अन्याय करार दिया है।
50 रुपये रोज पर गुजारा, टैक्स कहां से दें?
राजेश राठौड़ ने राज्य के नीति-नियंताओं से तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि जिस प्रदेश में लगभग 85 लाख परिवार मात्र 5 किलो मुफ्त अनाज पर निर्भर हैं वहां आम जनता की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य की एक बड़ी आबादी जो लगभग 10 करोड़ के करीब है वह औसतन मात्र 50 रुपये प्रतिदिन की आमदनी पर अपना जीवन यापन करने को मजबूर है। ऐसे में यह सरकार उनसे प्रतिमाह 1200 रुपये का हाउसिंग या मेंटेनेंस टैक्स वसूलने का फरमान कैसे सुना सकती है? यह फरमान उन लोगों के लिए न केवल अनुचित है बल्कि एक बड़ा आर्थिक बोझ भी है।
जाति आधारित सर्वे के आंकड़ों से खुली पोल
कांग्रेस प्रवक्ता ने राज्य सरकार के ही जाति आधारित सर्वे के आंकड़ों का सहारा लेते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वे के नतीजे राज्य की भयावह गरीबी की तस्वीर पेश करते हैं:
- अत्यधिक गरीबी: राज्य में लगभग 94 लाख परिवार ऐसे हैं जिनकी मासिक आय 6000 रुपये से भी कम है। इसका सीधा अर्थ यह है कि लगभग 5 करोड़ लोग मात्र 40 रुपये प्रतिदिन की कमाई पर जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
- निम्न आय वर्ग: वहीं, 81 लाख परिवार ऐसे हैं जिनकी मासिक कमाई 10,000 रुपये से कम है। यानी लगभग 4 करोड़ लोग महज 67 रुपये प्रतिदिन की आय पर अपना गुजारा कर रहे हैं।
सरकार का रवैया जनविरोधी: कांग्रेस
राजेश राठौड़ ने आगे कहा कि जिन लोगों के पास अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं उन पर टैक्स का बोझ डालना किसी भी दृष्टिकोण से न्यायोचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार की मौजूदा सरकार धरातल की हकीकत से पूरी तरह अनभिज्ञ है। प्रदेश के नागरिकों के साथ यह सरकार लगातार अन्याय कर रही है जिसे कांग्रेस कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने इस टैक्स नीति को वापस लेने की मांग की है ताकि गरीब परिवारों को थोड़ी राहत मिल सके।

