कुंदन कुमार, पटना। बिहार में वित्त रहित शिक्षा नीति और शिक्षकों के भविष्य की अनिश्चितता को लेकर कांग्रेस पार्टी ने बड़ा मोर्चा खोल दिया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर बिहार कांग्रेस की ओर से ‘कफन पदयात्रा’ निकाली जाएगी, जो राजधानी के गांधी मैदान से शुरू होकर सप्तमूर्ति तक जाएगी और इसके बाद जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा। पार्टी नेताओं का स्पष्ट कहना है कि यदि 5 सितंबर तक सरकार ने शिक्षकों की मांगें पूरी नहीं कीं, तो 6 सितंबर से गर्दनीबाग में अनिश्चितकालीन ‘शिक्षा सत्याग्रह अभियान’ शुरू किया जाएगा, जो मांगे पूरी होने तक जारी रहेगा। इसके साथ ही राज्यव्यापी हस्ताक्षर अभियान चलाने की भी योजना है। इस आंदोलन की घोषणा बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और सेवा दल के चेयरमैन डॉ. संजय यादव ने संयुक्त रूप से की है।
चार दशक पुरानी वित्त रहित व्यवस्था और शिक्षकों का दर्द
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कफन यात्रा के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस अनोखे विरोध प्रदर्शन का मकसद सरकार और समाज को यह समझाना है कि जिन शिक्षकों ने पूरी जिंदगी छात्रों का भविष्य गढ़ने में लगा दी, आज उनका अपना भविष्य ही पूरी तरह अंधकारमय और असुरक्षित है। बिहार में चली आ रही वित्त रहित शिक्षा व्यवस्था का इतिहास चार दशकों से अधिक पुराना है। वर्ष 1982 से अस्तित्व में आई इस व्यवस्था के तहत प्रदेश में बड़ी संख्या में स्कूल और कॉलेज खुले, लेकिन विडंबना यह है कि इनमें पढ़ाने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों की सेवा शर्तें आज तक स्थायी नहीं हो सकीं।
सरकार से स्पष्ट रोडमैप और अदालती फैसलों के अनुपालन की मांग
वर्ष 2008 में सरकार ने इस नीति में संशोधन कर अनुदान आधारित व्यवस्था शुरू की थी, जिसमें संस्थानों के प्रदर्शन के आधार पर अनुदान देने का नियम बनाया गया। इस दौरान पटना हाईकोर्ट में भी वित्त रहित और संबद्ध कॉलेजों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामले पहुंचे, जहां न्यायालय ने अनुदान, नियुक्ति और वेतनमान को लेकर कई निर्देश दिए, जिनका आज तक सही से अनुपालन नहीं हुआ है। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार वित्त रहित शिक्षा नीति को जड़ से समाप्त करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करे और सभी संबंधित विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के समायोजन के लिए ठोस नीति बनाए।
जिलों से उठी आवाज और सेवा दल का राज्यव्यापी आंदोलन
बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के चेयरमैन डॉ. संजय यादव ने बताया कि इसी ज्वलंत मुद्दे को लेकर सेवा दल ने पहले ही राज्य के कई जिलों में प्रदर्शन, पदयात्रा और ज्ञापन के जरिए आंदोलन की शुरुआत कर दी थी। हर जिले में शिक्षकों और कर्मचारियों का अभूतपूर्व समर्थन मिला है, जिससे यह साबित होता है कि वित्त रहित शिक्षा नीति अब किसी एक संगठन या जिले की समस्या न रहकर पूरे बिहार के शिक्षक समाज की सबसे बड़ी लड़ाई बन चुकी है। तीखे तेवर अपनाते हुए उन्होंने यहां तक कहा कि यदि सरकार मांगें पूरी नहीं कर सकती, तो वह सभी शिक्षकों को कफन ही दे दे, ताकि वे गर्व से कह सकें कि उन्हें रोटी-कपड़ा भले न मिला हो, पर सरकार ने कफन जरूर मुहैया कराया है।
संवादहीनता खत्म कर समस्याओं का हो समाधान
कांग्रेस का यह भी तर्क है कि सरकार संस्थानों की मान्यता, संबद्धता, छात्र संख्या, शिक्षक योग्यता और नियुक्ति प्रक्रियाओं की जांच अवश्य करे, लेकिन जांच की आड़ में समस्याओं को अनिश्चितकाल के लिए लटकाया नहीं जाना चाहिए। सरकार को शिक्षकों के नियमित वेतनमान और पेंशन व्यवस्था पर गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए। पार्टी ने मांग की है कि वित्त रहित शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित किया जाए ताकि उनकी समस्याओं का सीधा और स्थायी समाधान निकल सके।



