​bihar news: बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) ने राज्य के विश्वविद्यालयों में संविदा आधार पर होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। आयोग ने आवेदन के समय जमा किए जाने वाले नोटराइज्ड शपथ पत्र के प्रारूप में बदलाव करते हुए इसे और अधिक सख्त बना दिया है। नए नियमों के तहत, आवेदकों को अपनी सेवा और दस्तावेजों की सत्यता को लेकर कई कड़े वादे करने होंगे।

​अब भविष्य के नियमितीकरण का दावा नहीं

​संशोधित निर्देशों के अनुसार, अब प्रत्येक अभ्यर्थी को शपथ पत्र में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख करना होगा कि यह नियुक्ति पूर्णतः संविदा आधारित है। अभ्यर्थी भविष्य में इस सेवा के आधार पर स्थायी नौकरी या पद के नियमितीकरण के लिए कोई कानूनी दावा पेश नहीं करेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि भले ही इस संविदा अवधि को भविष्य में शिक्षण अनुभव के तौर पर मान्यता दी जाएगी लेकिन यह नियुक्ति स्वतः ही नियमित पद में परिवर्तित नहीं होगी।
​आयोग ने सभी उम्मीदवारों को आगाह किया है कि वे केवल संशोधित प्रारूप का ही उपयोग करें। पुराने या पहले से जारी प्रारूप में अपलोड किए गए शपथ पत्र को आयोग द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा। अतः आवेदन करने से पहले नए प्रारूप को वेबसाइट से डाउनलोड करना अनिवार्य है।

​दस्तावेजों की सत्यता और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

​नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आयोग ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। शपथ पत्र में अभ्यर्थियों को यह लिखित घोषणा करनी होगी कि उनके द्वारा आवेदन के साथ संलग्न किए गए सभी शैक्षणिक प्रमाणपत्र, डिग्रियां और अन्य दस्तावेज पूरी तरह से असली और वैध हैं।
​आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जांच के किसी भी स्तर पर कोई भी दस्तावेज फर्जी, जाली या भ्रामक पाया जाता है, तो अभ्यर्थी की सेवा तत्काल प्रभाव से बिना किसी पूर्व सूचना के समाप्त कर दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, दोषी पाए जाने वाले अभ्यर्थी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ विभागीय कार्यवाही भी शुरू की जाएगी।
​यह निर्णय उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो भर्ती प्रक्रिया में अनुचित साधनों का उपयोग करने का प्रयास कर सकते हैं। आयोग ने सभी उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे आवेदन फॉर्म भरते समय पूरी सावधानी बरतें और केवल प्रामाणिक दस्तावेज ही अपलोड करें ताकि बाद में किसी भी प्रकार की प्रतिकूल स्थिति से बचा जा सके।