कुंदन कुमार, पटना। बिहार में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में सरकार ने एक बेहद क्रांतिकारी और बड़ा कदम उठाया है। सहकारिता विभाग के प्रयासों से राज्य में सहकारिता आंदोलन अब एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। सरकार के इन दूरदर्शी फैसलों से न केवल किसानों की आमदनी में भारी इजाफा होगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए और अभूतपूर्व अवसर भी सृजित होंगे। राज्य सरकार की इस पहल से किसानों के जीवन स्तर में सुधार आने की पूरी उम्मीद है।
नई सहकारी चीनी मिल और आदर्श शुगर कॉम्प्लेक्स का होगा निर्माण
बिहार के सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने घोषणा की है कि राज्य में चीनी उद्योग और किसानों के आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे। इसके तहत मधुबनी जिले के सकरी में एक अत्याधुनिक नई सहकारी चीनी मिल की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा, दरभंगा जिले के रैयाम में एक आधुनिक ‘आदर्श शुगर कॉम्प्लेक्स’ बनाया जाएगा। इन दोनों परियोजनाओं के शुरू होने से गन्ना किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
बिहार राज्य सहकारिता नीति 2026 और डिजिटल आधुनिकीकरण
सहकारिता क्षेत्र को पारदर्शी, आधुनिक और तकनीक-युक्त बनाने के लिए सरकार ने ‘बिहार राज्य सहकारिता नीति 2026’ को लागू किया है। इस नई नीति के माध्यम से राज्य की सभी सहकारी समितियों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल सेवाओं से जोड़ा जा रहा है। किसानों को अब खेती-किसानी से जुड़ी हर जानकारी और योजना का लाभ डिजिटल माध्यमों से आसानी से मिल सकेगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता आएगी।
धान अधिप्राप्ति, फसल बीमा और सब्जी प्रसंस्करण को बढ़ावा
किसानों की उपज को सही मूल्य दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसके तहत धान अधिप्राप्ति की प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाया गया है। किसानों को प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम से सुरक्षित रखने के लिए ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ का दायरा बढ़ाया जा रहा है। साथ ही, कृषि क्षेत्र में विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए ‘सब्जी प्रसंस्करण’ को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है, ताकि किसानों को उनकी सब्जियों का बेहतर और लाभकारी मूल्य मिल सके।
पैक्स (PACS) बनेंगे मल्टीपरपज हब: सीएससी और जन औषधि केंद्र की सुविधा
गांवों की प्राथमिक कृषि साख समितियों यानी पैक्स (PACS) को अब केवल ऋण वितरण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इन्हें ग्रामीण विकास के बड़े केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। पैक्सों को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), जन औषधि केंद्र और प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के रूप में बदला जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को एक ही छत के नीचे बैंकिंग, सरकारी डिजिटल सेवाएं, सस्ती जेनेरिक दवाइयां और कृषि से जुड़ी सभी जरूरी सामग्री आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।
बकरी पालन और मखाना सहकारिता को मिल रहा है विशेष बढ़ावा
कृषि के साथ-साथ पशुपालन और पारंपरिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए सहकारिता विभाग ने अनूठी पहल की है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 481 प्रखंडों में ‘बकरी पालक सहकारी समितियों’ का सफल गठन किया जा चुका है, जिससे पशुपालकों को संगठित बाजार और मदद मिल रही है। इसके साथ ही, बिहार की शान माने जाने वाले मखाना उद्योग को बढ़ावा देने के लिए राज्य में 67 ‘मखाना सहकारी समितियों’ का भी पंजीकरण किया जा चुका है, जिससे मखाना उत्पादक किसानों को वैश्विक स्तर पर पहचान और उचित लाभ मिलेगा।


