Bihar news: बिहार में ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनवाने की प्रक्रिया अब और अधिक सख्त और सुरक्षित होने जा रही है। राज्य के परिवहन विभाग ने सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ड्राइविंग लाइसेंस के लिए नए अनिवार्य नियम तैयार किए हैं जो अगस्त 2026 से प्रभावी होने की संभावना है। अब बिना विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किए कोई भी व्यक्ति लर्निंग या स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त नहीं कर पाएगा।
अनिवार्य प्रशिक्षण: अब सर्टिफिकेट जरूरी
नए नियमों के तहत ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी को पहले किसी मान्यता प्राप्त सरकारी या निजी ड्राइविंग स्कूल से प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा। इस प्रशिक्षण की अवधि वाहन के प्रकार पर निर्भर करेगी:
- कार और बाइक (नॉन-कमर्शियल): 21 दिनों का प्रशिक्षण।
- हैवी कमर्शियल वाहन: 30 दिनों का प्रशिक्षण।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अभ्यर्थी को एक प्रशिक्षण प्रमाणपत्र (ट्रेनिंग सर्टिफिकेट) दिया जाएगा, जिसे एम-परिवहन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इसके बिना लाइसेंस की आवेदन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी।
डीटीओ कार्यालय में होगी दस्तावेजों की कड़ी जांच
लर्निंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षा पास करने के बाद आवेदक को डीटीओ कार्यालय में अपने मूल दस्तावेजों का सत्यापन कराना होगा। इस दौरान, अपलोड किए गए ट्रेनिंग सर्टिफिकेट की गहन जांच की जाएगी। यदि कोई प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है तो आवेदक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। परिवहन विभाग का स्पष्ट मानना है कि बिना उचित प्रशिक्षण के वाहन चलाना सड़क सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।
प्रदेश भर में खुलेंगे 200 नए ड्राइविंग स्कूल
नए नियमों के लागू होने के बाद प्रशिक्षण की मांग में भारी उछाल आने की उम्मीद है। इसे देखते हुए परिवहन विभाग पूरे राज्य में 200 नए ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल खोलने की योजना पर काम कर रहा है। इनमें से 66 स्कूलों को विभाग से पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है। ये स्कूल अभ्यर्थियों को पेशेवर तरीके से गाड़ी चलाना, ट्रैफिक नियमों का पालन, लेन अनुशासन और विपरीत परिस्थितियों में ड्राइविंग करना सिखाएंगे।
सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता
पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिहार में 4.32 लाख स्थायी और 5.84 लाख लर्निंग लाइसेंस जारी किए गए। पिछले पांच वर्षों में राज्य में कुल 21.38 लाख लाइसेंस बन चुके हैं। विभाग के सचिव राज कुमार ने बताया कि इस नई व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। विभाग की ओर से इस संबंध में फाइल मुख्यमंत्री सचिवालय भेजी जा चुकी है। मंजूरी मिलते ही सभी जिलों के परिवहन पदाधिकारियों (DTO) को निर्देश जारी कर दिए जाएंगे।
यह बदलाव न केवल चालकों को कुशल बनाएगा बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

