अतीश दीपंकर, भागलपुर। बिहार सरकार ने राज्य में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। इस दिशा में भागलपुर सहित पूरे राज्य में प्रशासनिक मशीनरी को और अधिक सक्रिय कर दिया गया है। सचिव, बिहार सरकार की अध्यक्षता में आयोजित 8वीं एनसीओआरडी (NCORD) की उच्चस्तरीय बैठक में कई कड़े और निर्णायक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य युवाओं और समाज को नशे के जाल से सुरक्षित रखना है।
शैक्षणिक संस्थानों के पास सख्ती और ड्रग-फ्री जोन
राज्य के सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के चारों तरफ 500 मीटर के दायरे को अनिवार्य रूप से ‘ड्रग-फ्री जोन’ घोषित किया गया है। मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो द्वारा इस संबंध में भागलपुर सहित सभी जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को विस्तृत दिशा-निर्देश पहले ही भेजे जा चुके हैं, ताकि शिक्षण संस्थानों के आसपास नशीले पदार्थों की किसी भी प्रकार की गतिविधि को तुरंत प्रभाव से रोका जा सके।



सीमावर्ती जिलों और रेलवे मार्गों पर कड़ी निगरानी
मादक पदार्थों की अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करी पर नकेल कसने के लिए सीमावर्ती जिलों में विशेष और सघन अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, रेल परिसर और ट्रेनों के माध्यम से होने वाले नशीले पदार्थों के अवैध परिवहन को रोकने के लिए रेलवे पुलिस अधीक्षकों को भी त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
एनडीपीएस मामलों की समीक्षा और सख्त कानूनी शिकंजा
बैठक के दौरान पिछले पांच वर्षों में एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों, गिरफ्तार अभियुक्तों और जब्त किए गए अवैध मादक पदार्थों की व्यापक समीक्षा की गई। इसमें गांजा, हेरोइन, स्मैक, कोकीन, अफीम और नशीले कफ सिरप की जब्ती के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। संगठित रूप से तस्करी करने वाले अपराधियों पर कठोर कानूनी शिकंजा कसने के लिए पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम के तहत प्रस्ताव तैयार कर गृह विभाग को भेजे गए हैं, जिससे अपराधियों की अवैध संपत्ति और गतिविधियों पर प्रभावी रोक लग सके।
पुनर्वास केंद्र और पुलिस अधिकारियों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया
नशे की चपेट में आ चुके युवाओं के समुचित उपचार और समाज की मुख्यधारा में उनकी वापसी के लिए मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 के अंतर्गत पंजीकृत नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों (आईआरसीए और डीडीएसी) के संचालन की समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त, पुलिस अनुसंधान को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए अधिकारियों को तलाशी, जब्ती, नमूना संग्रह और अनुसंधान से जुड़ी एसओपी (SOP) हैंडबुक उपलब्ध करा दी गई है, ताकि किसी भी स्तर पर कानूनी खामी न बचे।
बिहार सरकार के इन सख्त कदमों से स्पष्ट है कि राज्य में अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



