Bihar news: बिहार के सभी सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने और बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 4 जुलाई को विशेष ‘अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी’ (PTM) का आयोजन किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने उन सभी जिलों को यह निर्देश अनिवार्य रूप से पूरा करने को कहा है, जहां 27 जून को ‘स्वागत सप्ताह (बैक टू स्कूल)’ अभियान के दौरान बैठकें नहीं हो पाई थीं।
ड्रॉपआउट मुक्त शिक्षा और नामांकन पर जोर
इस संगोष्ठी का मुख्य विषय ड्रॉपआउट, सरकारी योजनाएं एवं विद्यालय की मौलिक सुविधाएं निर्धारित किया गया है। विभाग का प्राथमिक लक्ष्य विद्यालय से बाहर हो चुके बच्चों की पहचान करना और उन्हें पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। शिक्षा विभाग के अनुसार, बच्चों के नामांकन और उनकी निरंतर उपस्थिति को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों और अभिभावकों के बीच एक साझा रणनीति बनाना अत्यंत आवश्यक है।
घर पर पढ़ाई का सकारात्मक और अनुकूल वातावरण
विद्यालय की शिक्षा तभी पूर्ण रूप से प्रभावी हो सकती है, जब घर पर भी बच्चों को सीखने के लिए प्रोत्साहन मिले। इस संगोष्ठी के माध्यम से अभिभावकों को प्रेरित किया जाएगा कि वे घर पर बच्चों की पढ़ाई के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करें। उन्हें बच्चों के दैनिक अध्ययन, गृहकार्य (होमवर्क) और विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय रुचि लेने के लिए जागरूक किया जाएगा।
सरकारी योजनाओं की जानकारी का प्रसार
बैठक के दौरान राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और विद्यालयों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं के बारे में अभिभावकों को विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसमें मिड-डे मील, पोशाक, छात्रवृत्ति, पाठ्यपुस्तक वितरण और आधारभूत संरचना से जुड़ी जानकारी शामिल होगी, ताकि प्रत्येक अभिभावक इन योजनाओं का लाभ अपने बच्चों को दिला सकें।
जनभागीदारी का एक व्यापक अभियान
शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों से यह अपील की है कि वे इस कार्यक्रम को केवल एक औपचारिक बैठक तक ही सीमित न रखें, बल्कि इसे ‘जनभागीदारी अभियान’ के रूप में विकसित करें। विभाग का यह मानना है कि शिक्षक और अभिभावक के बीच का यह संवाद बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव रखेगा। यह प्रयास सुनिश्चित करेगा कि राज्य का हर बच्चा आत्मविश्वास के साथ नियमित रूप से विद्यालय आए और अपनी शिक्षा प्रक्रिया से निरंतर जुड़ा रहे।

