भोजपुर। जिले के बेलौटी में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार मानवाधिकार आयोग (BHRC) ने प्रशासन के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा निर्देश जारी किया है। आयोग ने राज्य सरकार को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया और विस्तृत जांच अपनी जगह है लेकिन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मृतक के माता-पिता को तुरंत प्रभाव से अंतरिम मुआवजा प्रदान किया जाए।
आयोग की टिप्पणी और मानवीय संवेदना
आयोग ने इस पूरी घटना को अत्यंत दुखद और गंभीर करार दिया है। एक युवा लड़के की जान जाने को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए आयोग ने कहा कि घटना की भयावहता का अंदाजा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही लगाया जा सकता है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट है कि भरत भूषण की मौत अत्यधिक रक्तस्राव और गोली लगने से उपजे सदमे के कारण हुई। आयोग ने माना कि इस मामले में सीधे तौर पर पुलिस की कार्यशैली और सरकारी तंत्र की जवाबदेही पर बड़े सवाल उठ रहे हैं, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।
जांच में ढिलाई पर नाराजगी
इससे पूर्व मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में बिहार के मुख्य सचिव डीजीपी और भोजपुर के एसपी को सख्त आदेश देते हुए 4 सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा था। हालांकि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद पुलिस और प्रशासन की ओर से कोई संतोषजनक रिपोर्ट पेश नहीं की गई।
प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह रहा कि एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) को स्वयं आयोग के समक्ष उपस्थित होकर जांच प्रक्रिया जारी होने का हवाला देना पड़ा और अतिरिक्त दो सप्ताह का समय मांगना पड़ा। समय पर रिपोर्ट न मिलने से आयोग ने नाराजगी जताई है और अब पीड़ित परिवार को राहत राशि देने पर जोर दिया है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार आयोग के इस आदेश का पालन कितनी जल्दी करती है।

