पटना। बिहार में मुख्यमंत्री का जनता दरबार बंद होने के बाद पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में हर दिन अपनी फरियाद लेकर पहुंच रहे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल को शपथ लेने के बाद अप्रैल महीने में पांच दिन (17, 18, 20, 21 और 23 अप्रैल) जनता दरबार का आयोजन किया था। इस दौरान राज्यभर से आए लोगों ने सीधे मुख्यमंत्री को अपनी समस्याएं बताई थीं। हालांकि, 23 अप्रैल के बाद से इस कार्यक्रम के स्थगित होने के कारण अब आम जनता में भारी नाराजगी है। फरियादियों का आरोप है कि अब केवल आवेदन जमा किए जा रहे हैं, लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।

​जमीन कब्जे की शिकायत: 4 हजार आवेदनों के बाद भी न्याय नहीं

​मधुबनी जिले के श्रवण कुमार पिछले तीन दिनों से पटना में भटक रहे हैं। उनका आरोप है कि अमरिका देवी की पुश्तैनी जमीन और मकान पर भू-माफियाओं ने अवैध कब्जा कर लिया है। स्थानीय पुलिस इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। श्रवण कुमार ने बताया कि वे अब तक विभिन्न सरकारी कार्यालयों में करीब चार हजार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन न तो प्राथमिकी दर्ज हुई और न ही आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। मुख्य सचिव माधव सिंह के नाम पत्र होने के बावजूद उन्हें सचिवालय के भीतर जाने या अधिकारियों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई।

​एनजीओ और सामाजिक संस्थाएं आर्थिक संकट में

​हिलसा से आए शैलेंद्र चौधरी अपने एनजीओ के माध्यम से पिछले दस वर्षों से महिला सशक्तिकरण का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने सरकारी योजनाओं से सहायता के लिए चार महीने पहले सचिवालय में आवेदन दिया था, जिसका अब तक कोई जवाब नहीं मिला। इसी तरह, सासाराम की सामाजिक संस्था ‘लोक कल्याण समिति’ के राजेश कुमार ने बताया कि सरकार से बकाया भुगतान न मिलने के कारण उनकी संस्था बंद होने की कगार पर है। आर्थिक संकट की वजह से कर्मचारी काम छोड़ रहे हैं और उन्हें सिर्फ खोखले आश्वासन मिल रहे हैं।

​सड़क निर्माण में धांधली और आत्मदाह की चेतावनी

​मोहद्दीनगर के राम लाल शाह ने हाजीपुर-बछवारा सड़क निर्माण परियोजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से पैसों के दम पर रसूखदारों के मकान बचाए जा रहे हैं, जबकि गरीबों के आशियाने गलत नापी करके तोड़े जा रहे हैं। राम लाल ने 23 अप्रैल को मुख्यमंत्री को सीधे आवेदन दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब उन्होंने न्याय न मिलने पर मुख्यमंत्री सचिवालय परिसर में ही अनशन और आत्मदाह करने की चेतावनी दी है। सचिवालय पहुंच रहे अन्य नाराज फरियादियों ने भी मांगें पूरी न होने पर वहीं धरने पर बैठने का एलान किया है।