नालंदा। पंच पहाड़ियों की गोद में बसी पौराणिक और ऐतिहासिक नगरी राजगीर इस समय पूरी तरह से पुरुषोत्तम मास (मलमास) के रंग में सराबोर हो चुकी है। विश्व प्रसिद्ध मलमास मेले के पहले ही दिन श्रद्धालुओं का ऐसा अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा कि बीते कई सालों के रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए। देश के कोने-कोने से पहुंचे एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पहले ही दिन पवित्र कुंडों में डुबकी लगाकर 33 कोटि देवी-देवताओं का आशीर्वाद लिया। ज्येष्ठ महीने की तपती धूप और उमस भरी गर्मी भी भक्तों के अटूट उत्साह और गगनभेदी जयकारों के आगे पूरी तरह बेअसर साबित हुई।
छुट्टी के दिन अहले सुबह से लगी कतारें
पंडा कमेटी के मुताबिक, मलमास का पहला दिन होने और साथ में रविवार का अवकाश होने के कारण उम्मीद से कहीं ज्यादा संख्या में लोग पवित्र स्नान के लिए पहुंचे। पापों से मुक्ति और मोक्ष की कामना लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला तड़के सुबह तीन बजे से ही शुरू हो गया था। देखते ही देखते कुंडों की ओर जाने वाले रास्तों पर भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, भीड़ बढ़ती गई, लेकिन श्रद्धालुओं के चेहरों पर थकान की जगह एक अद्भुत चमक और जुबां पर ईश्वर का जयघोष था।

प्रशासन की पुख्ता व्यवस्था और बुजुर्गों का उत्साह
जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महिला और पुरुषों के वास्ते अलग-अलग जिग-जैग कतारों की व्यवस्था की थी, जहां अमीर-गरीब का भेद मिटाकर सभी एक समान श्रद्धा से खड़े दिखे। गर्मी को देखते हुए वाटरप्रूफ पंडालों में कूलर और पंखे लगाए गए थे। इस बार मेले में पुरुषों की तुलना में महिलाओं, विशेषकर 70 वर्ष से अधिक उम्र की बुजुर्ग महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा देखी गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धालुओं ने सबसे पहले सरस्वती कुंड, फिर सप्तधारा और अंत में ब्रह्मकुंड सहित अन्य 22 कुंडों और 52 धाराओं में डुबकी लगाई। अब सभी को 27 मई को होने वाले पहले ‘शाही स्नान’ का इंतजार है।
वैतरणी नदी का महत्व और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
इस पावन मेले में बिहार के अलावा नेपाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश सहित देश-विदेश के कई हिस्सों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि मलमास के दौरान सभी देवी-देवता एक महीने के लिए राजगीर में ही वास करते हैं। इस दौरान यहां की वैतरणी नदी में गाय की पूंछ पकड़कर पार करने से मोक्ष और स्वर्ग की प्राप्ति होती है। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं; मेला क्षेत्र में 950 दंडाधिकारी, 530 पुलिस अधिकारी, घुड़सवार दल और 550 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। साथ ही, श्रद्धालुओं को महंगे होटलों से बचाने के लिए जीविका दीदियों द्वारा 14 जगहों पर मात्र 35 रुपये में भरपेट भोजन कराया जा रहा है।

