पटना। बिहार और झारखंड के बीच पिछले दो वर्षों से सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर चला आ रहा गतिरोध आज समाप्त हो सकता है। इस ऐतिहासिक समझौते पर मुहर लगाने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज दिल्ली के दौरे पर हैं, जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया है। इस समझौते से दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित अंतर-राज्यीय सहयोग को एक नई दिशा मिलने की पूरी संभावना है।
सोन नदी समझौते से कृषि और सिंचाई को मिलेगा नया संबल
झारखंड के गठन के बाद से ही जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों में रस्साकशी जारी थी, जो अब एक सर्वमान्य फॉर्मूले पर आकर सुलझ गई है। समझौते के तहत बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। गंगा की प्रमुख दक्षिणी सहायक नदी सोन पूर्वी भारत की कृषि रीढ़ मानी जाती है। इस समझौते से सोन नहर प्रणाली की सिंचाई योजनाओं को एक स्थिर और मजबूत आधार मिलेगा, जिसका सीधा लाभ भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, पटना, गया और अरवल जैसे प्रमुख जिलों के किसानों को पहुंचेगा।
दिल्ली दौरे और राजनीतिक सरगर्मी के बीच बाढ़ नियंत्रण पर भी फोकस
मुख्यमंत्री के इस महत्वपूर्ण दिल्ली दौरे पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सवाल खड़े किए हैं। राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने सीएम के लगातार दिल्ली दौरों पर तंज कसते हुए कहा है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन मुलाकातों से बिहार की जनता को क्या ठोस लाभ मिल रहा है। हालांकि, इन राजनीतिक बयानों के बीच मुख्यमंत्री का एजेंडा पूरी तरह विकास और सुरक्षा पर केंद्रित है। गृह मंत्रालय के कर्तव्य भवन में होने वाली बैठक के बाद, सीएम सम्राट शाम चार बजे केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात करेंगे। वर्तमान में बिहार पर मंडराते बाढ़ के गंभीर खतरे को देखते हुए यह बैठक जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं के लिहाज से अत्यंत निर्णायक साबित होगी।


