बिहार के गांवों में लंबे समय से चले आ रहे जमीनी झगड़ों को हमेशा के लिए समाप्त करने की दिशा में सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने हाल ही में राज्य के पांच छोटे जिलों जहानाबाद, लखीसराय, शिवहर, अरवल और शेखपुरा के विशेष सर्वेक्षण कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन जिलों में इसी महीने 15 अगस्त तक सर्वे के कार्य को पूरी तरह से अमलीजामा पहनाना है, जिसके लिए प्रशासनिक अमले को अन्य अभियानों से पूरी तरह मुक्त रखा गया है।

​थानों में दर्ज अधिकांश मामलों की जड़ है भूमि विवाद

​समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री डॉ. जायसवाल ने इस बात पर जोर दिया कि यह सर्वे ग्रामीणों के लिए एक बहुत बड़ी राहत साबित होगा। थानों में दर्ज होने वाले अधिकांश मामलों का सीधा संबंध भूमि विवादों से ही होता है। इस विशेष सर्वेक्षण के पूरा होने से न केवल भूमि अभिलेखों में अभूतपूर्व पारदर्शिता आएगी, बल्कि जमीन के मुकदमों में भी भारी कमी दर्ज की जाएगी।
​हालांकि, बैठक के दौरान कुछ मौजों के आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध न होने पर मंत्री ने गहरी नाराजगी जताई और कार्य में कोताही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। पारदर्शिता और सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए अब सभी रिकॉर्ड्स को तुरंत पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा तथा इनके सुरक्षित रख-रखाव के वास्ते लेवल-7 के अधिकारियों की विशेष प्रतिनियुक्ति की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया की प्रगति की अगली समीक्षा ठीक 10 दिनों के बाद पुनः की जाएगी। इस अवसर पर विभाग के सचिव जय सिंह ने गैप एनालिसिस पर विशेष ध्यान केंद्रित करने को कहा, जबकि निदेशक सुहर्ष भगत ने सर्वे की अद्यतन स्थिति से सबको अवगत कराया।

​सर्वे प्रक्रिया से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें और नियम

  • ​बंटवारे के बिना भी जारी रहेगा सर्वे: यदि किसी परिवार में जमीन का आपसी बंटवारा अभी तक नहीं हुआ है, तो भी सर्वे का काम किसी भी परिस्थिति में रुकेगा नहीं। ऐसी स्थिति में जमीन का सर्वे उन्हीं पूर्वजों के नाम पर सुरक्षित रखा जाएगा जिनके नाम पर वह पहले से दर्ज है।
  • ​चार आसान चरणों में पूर्णता: यह संपूर्ण सर्वेक्षण चार चरणों किस्तवार, खानापुरी, सुनवाई और लगान बंदोबस्ती में संपन्न किया जा रहा है। प्रथम चरण में गांव की सीमा और नक्शा तैयार होता है, दूसरे चरण में जमीन मालिक तय कर कच्चा खतियान बनता है, तीसरे चरण में रैयतों को कागजात देकर आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं, और अंतिम चरण में आपत्तियों के निस्तारण के उपरांत अंतिम खतियान का प्रकाशन किया जाता है।
  • ​गायब खतियानों का समाधान: राज्य के कुल गांवों में से लगभग 8000 गांवों के पुराने कैडेस्ट्रल खतियान गायब हैं। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने रैयतों से स्वघोषणा के माध्यम से उनकी जमीन का ब्योरा मांगा है, जिसे लोग ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों माध्यमों से जमा कर रहे हैं।
  • ​90 वर्षों बाद ऐतिहासिक सर्वे: बिहार में लगभग 90 साल के लंबे अंतराल के बाद जमीन का यह वृहद सर्वे हो रहा है, जिसमें कुल 1.82 करोड़ रैयत शामिल हैं। पहले चरण में वर्ष 2019 से शुरू हुए इस कार्य की समयसीमा पूर्व में तीन बार बढ़ाई जा चुकी है, और अब इसे दिसंबर 2027 तक पूरी तरह से पूरा करने का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया है।