पटना। बिहार के दानापुर स्थित भट्टीपर पीपापुल के पास खाद्य संरक्षा विभाग की टीम ने दूध और पनीर विक्रेताओं के यहां औचक छापेमारी की है। इस दौरान लिए गए सात नमूनों में से एक दूध के सैंपल में शवों को सड़ने से बचाने वाले बेहद जहरीले रसायन फार्मेलिन की मिलावट की पुष्टि हुई है। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए डेयरी में रखे 180 लीटर जहरीले दूध को मौके पर ही मैदान में बहा दिया।
यह कार्रवाई खाद्य संरक्षा आयुक्त सह स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि के निर्देश पर, अभिहित पदाधिकारी सह खाद्य संरक्षा अधिकारी सुदामा चौधरी के नेतृत्व में की गई। जांच दल में वरीय विश्लेषक मुकेश चंद्र प्रसाद भी शामिल थे। शिकायतों के आधार पर पटना जंक्शन और दानापुर सहित प्रमुख दूध मंडियों में यह अभियान लगातार चलाया जा रहा है, जिसमें फेरिक क्लोराइड, सल्फ्यूरिक एसिड (H2SO4), डिस्टिल वाटर और टेस्ट ट्यूब के जरिए मौके पर ही स्टार्च और फार्मेलिन की जांच की जा रही है।
डेयरी संचालकों और पशुपालकों की मिलीभगत
जिस डेयरी के दूध में फार्मेलिन की मिलावट पकड़ी गई, वहां कोई रसायन नहीं मिला। डेयरी संचालक श्याम राय ने दावा किया कि उसने कोई मिलावट नहीं की है, बल्कि कुछ पशुपालक दूध की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और फटने से बचाने के लिए उसमें फार्मेलिन या अन्य पदार्थ मिलाकर लाते हैं। अधिकारियों के लिए सभी पशुपालकों पर निगरानी रखना और उन्हें जागरूक करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। खाद्य संरक्षा अधिकारियों ने संचालक को चेतावनी देते हुए फार्मेलिन के दुष्प्रभावों से अवगत कराया। इससे पहले पटना जंक्शन मंडी की जांच में फार्मेलिन तो नहीं मिला, लेकिन एक सैंपल में स्टार्च की मिलावट जरूर पाई गई।
सेहत के लिए कितना खतरनाक है मिलावटी दूध?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मिलावटी दूध का सेवन मानव शरीर के लिए बेहद घातक है:
- आंख और त्वचा पर असर: न्यू गार्डिनर अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. मनोज कुमार सिन्हा ने बताया कि फार्मेलिन के संपर्क में आने से आंखों में जलन, पानी आना, लाल होना और लंबे समय तक सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
- बच्चों पर कुपोषण का संकट: आईजीआईसी के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. बीरेंद्र कुमार सिंह के अनुसार, छोटे बच्चे अक्सर बाहरी दूध पर निर्भर होते हैं। यदि दूध में यूरिया, स्टार्च, डिटर्जेंट या गंदे पानी की मिलावट हो, तो बच्चों में गैस्ट्रोएंट्राइटिस, भूख न लगना, कुपोषण, विकास रुकना और कम आईक्यू जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा लंबे समय तक सेवन से किडनी और लिवर भी खराब हो सकते हैं।
ऐसे करें घर पर दूध की शुद्धता की जांच
- पानी की मिलावट: साफ कांच की प्लेट या चिकनी सतह पर दूध की एक बूंद डालें। अगर बूंद तेजी से बह जाए और पीछे सफेद निशान न छोड़े, तो पानी की मिलावट हो सकती है।
- स्टार्च की जांच: ठंडे दूध में आयोडीन की कुछ बूंदें मिलाने पर यदि रंग नीला या नीला-बैंगनी हो जाए, तो इसमें स्टार्च मौजूद है।
- डिटर्जेंट की पहचान: दूध में थोड़ा पानी मिलाकर जोर से हिलाने पर यदि बहुत लंबे समय तक झाग बना रहा हो, तो डिटर्जेंट की आशंका होती है।
- फार्मेलिन की जांच: टेस्ट ट्यूब में 10 मिलीलीटर दूध लेकर उसमें किनारे से 5 मिलीलीटर सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड डालने पर यदि सतह पर बैंगनी रंग का घेरा बने, तो फार्मेलिन की पुष्टि होती है (यह खतरनाक तेजाब है, इसलिए यह जांच प्रयोगशाला में ही कराना सुरक्षित है)।
कहां करें मिलावट की शिकायत?
- यदि आपको भी दूध में मिलावट का शक है, तो आप इन माध्यमों से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं:
- एफएसएसएआइ टोल-फ्री नंबर: 1800-11-2100
- बिहार खाद्य सुरक्षा विभाग ईमेल: [email protected]
- कार्यालय का पता: खाद्य संरक्षा पदाधिकारी का कार्यालय, सिविल सर्जन कार्यालय परिसर, गर्दनीबाग, पटना
- स्वास्थ्य विभाग ईमेल: [email protected]
शिकायत दर्ज कराते समय दुकान या डेयरी का नाम-पता, खाद्य पदार्थ का विवरण, खरीद की तारीख, बिल या पैकेट का बैच नंबर और फोटो जरूर साथ रखें ताकि त्वरित कार्रवाई की जा सके।



