कुंदन कुमार/ पटना। बिहार की सियासत में विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर है। सत्ताधारी गठबंधन (NDA) ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देते हुए सभी सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस घोषणा के साथ ही जहां कुछ दिग्गजों के टिकट कटने से खलबली मची है, वहीं चिराग पासवान की पार्टी LJP (रामविलास) ने एक बड़ा दांव खेलते हुए अशरफ अंसारी को मैदान में उतारने का निर्णय लिया है।
NDA का शक्ति प्रदर्शन: किसे मिला मौका, कौन हुआ बाहर?
केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद जारी सूची में भाजपा और जदयू ने अपने कोटे की चार-चार सीटों पर उम्मीदवारों को स्पष्ट कर दिया है। भाजपा ने अभिनेता पवन सिंह, डॉ. संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित पर भरोसा जताया है। वहीं, जदयू ने निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवरानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है।
इस सूची ने पूर्व विधान पार्षद हुलास पांडेय की उम्मीदों को करारा झटका दिया है। सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा नेता दीपक प्रकाश का नाम सूची में न होने को लेकर है। जब इस बाबत मंत्री श्रवण कुमार से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे पूरी तरह से भाजपा का आंतरिक मामला बताते हुए पल्ला झाड़ लिया।

LJP (रामविलास) का दांव
चिराग पासवान की पार्टी LJP (R) ने इस बार के चुनाव में अशरफ अंसारी को प्रत्याशी बनाकर सबको चौंका दिया है। इस कदम को आगामी चुनावों के लिहाज से एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। NDA की इस अंतिम सूची के साथ ही अब राज्य में चुनावी बिसात पूरी तरह से बिछ चुकी है। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात पर मंथन तेज हो गया है कि एनडीए का यह नया समीकरण आगामी चुनाव में क्या गुल खिलाएगा। उम्मीदवारों के ऐलान के साथ ही अब राजनीतिक दलों का सारा ध्यान जीत सुनिश्चित करने पर केंद्रित हो गया है।

