कुंदन कुमार/ पटना। बिहार विधान परिषद की रिक्त हो रही 10 सीटों (एक उपचुनाव सहित) के लिए चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। NDA ने अपने सभी 9 उम्मीदवारों का नामांकन दाखिल कर दिया है। नामांकन के बाद विधानसभा पोर्टिको में NDA नेताओं ने विक्ट्री साइन बनाकर अपनी जीत का भरोसा जताया है।
NDA का गणित और उम्मीदवार
NDA की रणनीति के तहत बीजेपी और जदयू ने 4-4 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं जबकि एक सीट लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को दी गई है। खास बात यह है कि इस सूची में RLM अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और वर्तमान पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का नाम शामिल नहीं है। इस घटनाक्रम के बाद चर्चा है कि उन्होंने अपने सोशल मीडिया बायो से ‘मंत्री’ का पद हटा दिया है।
कानूनी पेच में फंसे दीपक प्रकाश
दीपक प्रकाश के मंत्री पद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि अनुच्छेद 164(4) के प्रावधानों के बावजूद, बिना विधायक या विधान पार्षद बने उन्हें 6 महीने बाद पुनः मंत्री कैसे बनाया गया। विदित हो कि दीपक प्रकाश ने पहली बार 20 नवंबर 2025 को शपथ ली थी और 7 मई 2026 को सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार में उन्होंने दूसरी बार मंत्री पद संभाला।
महागठबंधन में ‘अपनों’ से ही चुनौती
महागठबंधन की ओर से राजद नेता सुनील सिंह ने अपना नामांकन भरा है। हालांकि, पार्टी के भीतर ही उनकी उम्मीदवारी पर सवाल उठने लगे हैं। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सुनील सिंह के नाम पर आपत्ति जताते हुए सीधे तौर पर तेजस्वी यादव की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा है, जिससे महागठबंधन में आंतरिक खींचतान स्पष्ट दिख रही है।
जीत का समीकरण (वोट का गणित)
मौजूदा विधानसभा में NDA के पास 202 विधायकों का मजबूत समर्थन है। गणितीय दृष्टिकोण से, एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 25 विधायकों के मतों की आवश्यकता होगी।
- NDA का पलड़ा भारी: बीजेपी (89), जदयू (85), लोजपा-आर (19), आरएलएम (4) और ‘हम’ का कुल योग 8 सीटों पर जीत पक्की करने के लिए पर्याप्त है।
- महागठबंधन: आंकड़ों के अनुसार, महागठबंधन के खाते में केवल 1 सीट जाती दिख रही है।

