​बिहार में मदरसा और संस्कृत बोर्ड से जुड़े हजारों शिक्षकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इन शिक्षकों को पिछले छह महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण उनके परिवारों का गुजारा करना भी मुश्किल हो गया है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा भुगतान न किए जाने पर राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। जेडीयू एमएलसी और अल्पसंख्यक आयोग समिति के अध्यक्ष मो. खालिद अनवर ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और तत्काल वेतन जारी करने की मांग की है। वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बिहार के सरकारी विद्यालयों में उर्दू, अरबी और फारसी शिक्षकों के अनुचित स्थानांतरण पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने अनुदानित मदरसों एवं संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक-कर्मियों के लंबित वेतन का अविलंब भुगतान करने तथा प्रत्येक सरकारी विद्यालय में उर्दू और संस्कृत के शिक्षकों की पदस्थापना सुनिश्चित करने का आग्रह किया है ताकि छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा मिल सके।

​नीतीश कुमार के विजन और शिक्षा सुधार

​एमएलसी खालिद अनवर ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा राज्य में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और सभी वर्गों को समान अवसर देने के लिए ऐतिहासिक कार्य किए हैं। मदरसा और संस्कृत बोर्ड के शिक्षकों के कल्याण के लिए भी कई सकारात्मक और दूरदर्शी कदम उठाए गए थे। इसके बावजूद, शिक्षा विभाग द्वारा पिछले छह महीनों से इन शिक्षकों का वेतन रोकना पूरी तरह से समझ से परे है और यह सरकार के मूल उद्देश्यों के विपरीत है।

​जांच के नाम पर लटकाया जा रहा मामला

मो. खालिद ​अनवर ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग केवल ‘जांच’ का बहाना बनाकर इस संवेदनशील मामले को अनावश्यक रूप से लंबित रख रहा है। इस प्रशासनिक सुस्ती के कारण हजारों शिक्षक और उनके आश्रित परिवार भुखमरी और गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें लगातार इन शिक्षकों के फोन आ रहे हैं, जो अपनी व्यथा साझा कर रहे हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

मुख्यमंत्री के आदेश की अनदेखी और खजाने में पैसों की कमी नहीं

एमएलसी ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री स्वयं मदरसा और संस्कृत बोर्ड के शिक्षकों का भुगतान समय पर सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश दे चुके हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस और सकारात्मक कार्रवाई न होना बेहद चिंता का विषय है। राज्य की वित्तीय स्थिति पर उठ रहे तमाम सवालों को खारिज करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार सरकार के खजाने में धन की कोई कमी नहीं है। यह समस्या किसी वित्तीय संसाधन की नहीं, बल्कि पूरी तरह से अधिकारियों की विभागीय उदासीनता का परिणाम है।

​आंदोलन की चेतावनी और सरकार की मुश्किलें

​इस पूरे प्रकरण पर शिक्षकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। शिक्षकों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द उनके बकाए वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो वे अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने को विवश होंगे। मो. खालिद अनवर ने भी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस गंभीर मुद्दे का समाधान नहीं निकाला गया, तो यह मामला एक बड़ा जन आंदोलन बन सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिक्षा विभाग और सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या त्वरित कदम उठाती है।