कुंदन कुमार, पटना। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट रही हर घर नल का जल योजना को सफल बनाने वाले कर्मी आज सोमवार (7 सितंबर) को अचानक से सड़क पर उतर आए। बिहार के अलग-अलग जिलों और प्रखंडों में नल जल योजना के तहत बोरिंग और पानी की सप्लाई व्यवस्था में काम करने वाले कर्मियों का आरोप है कि उन्हें वर्ष 2017 से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है, जिसे लेकर उन्हें इस तरह से सड़क पर उतरना पड़ा है।
22 दिनों से धरने पर बैठे थे कर्मी
प्रदर्शन कर रहे कर्मियों का कहना है कि सरकार की ओर से उन्हें महज 2 हजार रुपये मानदेय देने की बात कही गई थी, लेकिन सालों से उन्हें यह राशि भी नहीं मिली है। बता दें कि ये कर्मी अपनी छह सूत्री मांगों को लेकर पिछले 22 दिनों से पटना के गर्दनीबाग में धरने पर बैठे थे।
सीएम आवास का घेराव करने निकले कर्मी
लेकिन आज इनके सब्र टूट गया और गांधी मैदान से मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए निकल पड़े। पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास इन्हें रोक दिया। मौके पर बैरिकेडिंग के साथ दंगा नियंत्रण बल और वाटर कैनन की गाड़ियां तैनात की गई हैं।प्रदर्शनकारी कर्मियों की मांग है कि उनका मानदेय बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रति माह किया जाए, समय पर भुगतान सुनिश्चित हो और बिचौलियों की भूमिका खत्म करते हुए सीधे उनके बैंक खाते में राशि ट्रांसफर की जाए।
हमारी बदौलत सफल हुई योजना- कर्मी
पटना की सड़कों पर आज नल जल योजना के कर्मियों का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे कर्मियों ने गांधी मैदान से मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वर्ष 2017 से वे नल जल योजना के तहत लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें उनके काम का मानदेय नहीं मिला है। कर्मियों का कहना है कि कई लोगों ने नल जल योजना के लिए अपनी जमीन तक उपलब्ध कराई, ताकि गांव-गांव तक पानी पहुंचाने की योजना सफल हो सके।
पुलिस ने कर्मियों को जेपी गोलंबर के पास रोका
लेकिन योजना को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कर्मियों का कहना है कि वर्षों से उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अपनी मांगों को लेकर जब प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़े तो पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास उन्हें रोक दिया। मौके पर बैरिकेडिंग कर दी गई और दंगा नियंत्रण बल के साथ वाटर कैनन की गाड़ियां भी तैनात कर दी गईं। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करने लगे।
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