अविनाश श्रीवास्तव, सासाराम। ​बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने सासाराम दौरे के दौरान स्पष्ट किया है कि राज्य में पंचायत चुनाव की तिथियों और परिसीमन का निर्धारण पूरी तरह से निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में है। सासाराम पहुंचने पर उन्होंने स्थानीय गुरुद्वारे में मत्था टेका और इसके बाद पत्रकारों व स्थानीय लोगों से बातचीत करते हुए पंचायत चुनाव से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला।

​चुनाव आयोग के अधीन है पूरी प्रक्रिया

​मंत्री दीपक प्रकाश ने दो टूक शब्दों में कहा कि बिहार में आगामी पंचायत चुनाव कब आयोजित होंगे और इसका परिसीमन किस प्रकार होगा, इन सभी बातों का निर्णय केवल निर्वाचन आयोग ही करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया से पंचायती राज विभाग का सीधा लेना-देना नहीं है, क्योंकि चुनाव कराने और उसकी तारीखों की घोषणा करने की जिम्मेदारी संवैधानिक रूप से निर्वाचन आयोग के पास है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्य सरकार का पंचायती राज विभाग इस पूरी प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग को हर संभव तकनीकी और प्रशासनिक सहायता प्रदान कर रहा है।

​सात हजार की जनसंख्या पर आधारित होगा परिसीमन मानक

​परिसीमन की प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए मंत्री ने बताया कि अधिनियम के नियमों और गाइडलाइन के मुताबिक लगभग सात हजार की आबादी पर एक पंचायत के गठन का मानक तय किया गया है। इसी निर्धारित गाइडलाइन का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भौगोलिक और क्षेत्रीय परिस्थितियों के कारण पंचायतों की जनसंख्या में थोड़ा बहुत उतार-चढ़ाव या अंतर हो सकता है, लेकिन मुख्य आधार सात हजार की आबादी के आसपास का ही रखा गया है।

​तेजी से चल रहा है परिसीमन का कार्य

​पंचायती राज मंत्री ने जानकारी दी कि वर्तमान में बिहार के भीतर पंचायतों के परिसीमन का कार्य बेहद तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। निर्वाचन आयोग इस पूरी कवायद को पूरी पारदर्शिता और सटीकता के साथ अंजाम दे रहा है। अंत में उन्होंने दोहराया कि चुनाव की तिथियों के ऐलान से लेकर परिसीमन की रूपरेखा तक, अब सब कुछ निर्वाचन आयोग के अधीन है और विभाग की भूमिका केवल आयोग के कार्यों में सहयोग करने तक सीमित है।