पटना। बिहार में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं (पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद) के चुनाव को एक साल के लिए टालने का निर्णय लिया है। जो चुनाव अक्टूबर-नवंबर में प्रस्तावित थे, अब उनके अगले वर्ष जुलाई-अगस्त में आयोजित होने की संभावना है।

​परिसीमन और डेडिकेटेड कमीशन का पेच

चुनाव टलने का मुख्य कारण राज्य में नए सिरे से किया जाने वाला परिसीमन है। बिहार में पिछले 36 वर्षों से पंचायतों का परिसीमन नहीं हुआ था जिसे अब 2011 की जनसंख्या के आधार पर पूरा किया जाएगा। यह प्रक्रिया अगस्त से शुरू होकर अप्रैल 2027 तक चलेगी। इसके साथ ही पिछड़े वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक डेडिकेटेड कमीशन का गठन किया गया है जो 3 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। इन तकनीकी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही चुनाव की राह प्रशस्त होगी।

​विकास कार्यों पर नहीं पड़ेगा असर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि चुनाव टलने से पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की गति धीमी नहीं होगी। जिस तरह साल 2021 में कोरोना काल के दौरान परामर्शी समितियों के माध्यम से कामकाज चलाया गया था उसी मॉडल को अपनाते हुए वर्तमान पंचायत प्रतिनिधि अगले 9-10 महीने तक अपना दायित्व संभालते रहेंगे। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि सरकार समय पर चुनाव कराने की पक्षधर थी लेकिन परिसीमन और तकनीकी अनिवार्यताओं के कारण इसे आगे बढ़ाना पड़ा है।

​नए परिसीमन के लाभ

विशेषज्ञों के अनुसार 2011 की जनगणना के आधार पर वार्डों और पंचायतों की सीमाओं का पुनर्गठन करने से आबादी के अनुरूप संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। इससे पंचायतों में भौगोलिक और सामाजिक एकरूपता आएगी जो जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाएगी। कुल मिलाकर यह समयबद्ध प्रक्रिया बिहार की त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। नई सरकार के गठन में देरी जरूर होगी लेकिन प्रशासनिक निरंतरता बनी रहेगी।