पटना। बिहार में सार्वजनिक परिवहन के एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। राज्य की सड़कों से अब धीरे-धीरे डीजल बसों का धुआं कम होगा और उनकी जगह अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसें (E-Buses) लेंगी। केंद्र सरकार की ‘पीएम ई-बस सेवा योजना’ (फेज-II) के अंतर्गत बिहार को कुल 400 इलेक्ट्रिक बसों की सौगात मिली है, जिनमें से पहली खेप के रूप में 200 बसें जुलाई महीने से पहले परिचालन के लिए तैयार हो जाएंगी।

​जून के अंत तक शुरू होगा परिचालन

​बिहार परिवहन विभाग के सचिव राज कुमार के अनुसार, योजना के पहले चरण की 200 बसें जून के प्रथम सप्ताह तक बिहार पहुंच जाएंगी। विभाग का लक्ष्य है कि जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई की शुरुआत तक इन बसों को आम जनता के लिए सड़कों पर उतार दिया जाए। यह कदम न केवल राज्य की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाएगा, बल्कि यात्रियों को एक सुरक्षित और सुगम सफर का अनुभव भी प्रदान करेगा।

​ग्रीनसेल मोबिलिटी को मिली जिम्मेदारी

​बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए ग्रीनसेल मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड को ‘लेटर ऑफ अवार्ड’ जारी कर दिया है। भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा चयनित यह एजेंसी 9 मीटर श्रेणी की बसों की आपूर्ति करेगी। खास बात यह है कि बसों के संचालन से लेकर उनके तकनीकी रखरखाव तक की पूरी जिम्मेदारी इसी कंपनी की होगी।

​क्या है GCC मॉडल?

​इन बसों का संचालन ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल पर आधारित होगा। इस व्यवस्था के तहत निजी एजेंसी बसों के परिचालन और तकनीकी पहलुओं को संभालेगी, जबकि सरकार सेवा की गुणवत्ता और यात्रियों की सुविधाओं की निगरानी करेगी। इसके लिए राज्य भर में आधुनिक बस डिपो और चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाया जा रहा है, ताकि चार्जिंग और रखरखाव में कोई बाधा न आए।

​सुरक्षा और सुविधा से लैस होंगी बसें

​इन ई-बसों को यात्रियों की सुरक्षा और आराम को प्राथमिकता देते हुए डिजाइन किया गया है। इनमें शामिल प्रमुख सुविधाएं हैं:

  • ​लाइव ट्रैकिंग: बसों में GPS ट्रैकिंग सिस्टम होगा, जिससे यात्री मोबाइल पर बस की लोकेशन देख सकेंगे।
  • ​कड़ी सुरक्षा: हर बस में CCTV कैमरे और आपातकालीन स्थिति के लिए ‘पैनिक बटन’ की सुविधा होगी।
  • ​डिजिटल सूचना: रूट और स्टॉपेज की जानकारी के लिए डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे।
  • ​समावेशी डिजाइन: दिव्यांगजनों के लिए विशेष व्यवस्था और आरामदायक सीटों का प्रावधान किया गया है।

​पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

​बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन एक क्रांतिकारी बदलाव साबित होगा। डीजल बसों के मुकाबले शून्य कार्बन उत्सर्जन करने वाली ये बसें शहरों की हवा को शुद्ध रखने में मदद करेंगी। इससे न केवल ध्वनि प्रदूषण कम होगा, बल्कि सार्वजनिक परिवहन के मजबूत होने से सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव भी घटेगा।