कुंदन कुमार/ पटना। बिहार की राजधानी पटना में इन दिनों सरकारी बंगलों का आवंटन चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इन बदलावों के तहत महत्वपूर्ण बंगलों का आवंटन नए सिरे से किया गया है।
5 देशरत्न मार्ग अब स्वास्थ्य मंत्री का नया पता
लंबे समय से सुर्खियों में रहा 5 देशरत्न मार्ग बंगला अब बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को आवंटित कर दिया गया है। गौरतलब है कि यह वही बंगला है जिसे लेकर हाल ही में बिहार की राजनीति में जबरदस्त विवाद हुआ था।
विवादों से नाता
पूर्व में यह बंगला मुख्यमंत्री के लिए आरक्षित था और जब सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने इसे मुख्यमंत्री आवास के साथ अटैच कर दिया था। इस फैसले का विपक्ष ने कड़ा विरोध किया था और सरकार पर प्रोटोकॉल के उल्लंघन का आरोप लगाया था। बढ़ते दबाव और हंगामे के बीच सरकार ने उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके बाद से यह बंगला खाली पड़ा था। अब इसे स्वास्थ्य मंत्री को सौंपकर सरकार ने मामले को शांत करने की कोशिश की है।
रामकृपाल यादव को मिला 2 देशरत्न मार्ग
इसके साथ ही रामकृपाल यादव को 2 देशरत्न मार्ग स्थित बंगला आवंटित किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि इस आवंटन पर भी विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। विपक्ष का तर्क है कि यह बंगला मूल रूप से विधानसभा अध्यक्ष के लिए चिन्हित है, फिर इसे किसी अन्य नेता को क्यों दिया गया?
राजनीतिक मायने
बिहार में बंगलों को लेकर यह राजनीति कोई नई नहीं है, लेकिन 5 देशरत्न मार्ग को लेकर मचे घमासान के बाद सरकार का यह कदम बेहद सावधानी से उठाया गया प्रतीत होता है। जहां सत्ता पक्ष इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बता रहा है वहीं विपक्षी दल इसे सरकार की कार्यशैली पर निशाना साधने का मौका नहीं छोड़ रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बंगलों के इस नए आवंटन के बाद विपक्ष का विरोध थमता है या फिर यह मुद्दा विधानसभा के आगामी सत्रों में फिर से गूंजेगा। प्रशासनिक दृष्टि से देखा जाए तो सरकार ने खाली पड़े बंगलों का उपयोग सुनिश्चित करने की कोशिश की है लेकिन राजनीति में हर आवंटन के अपने मायने और विवाद होते हैं।

