पटना। ​बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। फरक्का जलसंधि को लेकर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के लगातार तीखे तेवरों के बीच, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भाजपा कोटे के सभी मंत्रियों की एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी। यह बैठक आज शाम 5 बजे मुख्यमंत्री आवास पर होनी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से इसे अचानक रद्द कर दिया गया है।
​इस बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जोरों पर थीं, क्योंकि इसके पीछे के निहितार्थ केवल संगठनात्मक नहीं बल्कि राजनीतिक भी माने जा रहे थे।

​अनिवार्य उपस्थिति और कड़े निर्देश

​बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भाजपा कोटे के सभी मंत्रियों को इसमें अनिवार्य रूप से शामिल होने के निर्देश दिए गए थे। जो मंत्री फिलहाल पटना या बिहार से बाहर थे, उन्हें भी अपना कार्यक्रम रद्द कर तुरंत वापस लौटने को कहा गया था। अचानक बुलाई गई इस आपात बैठक और इसकी टाइमिंग ने एनडीए गठबंधन के भीतर चल रही सियासी हलचल को और हवा दे दी थी।

​इन तीन प्रमुख मुद्दों पर होना था मंथन

  • ​सेवा संकल्प अभियान की तैयारी: आधिकारिक तौर पर बैठक का मुख्य एजेंडा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ की तैयारियों को बताया गया था। इसके तहत बिहार के जिलों में होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तय होनी थी और मंत्रियों को जिम्मेदारियां सौंपी जानी थीं।
  • ​फरक्का जलसंधि का गंभीर मुद्दा: हालांकि आधिकारिक एजेंडे में इसका जिक्र नहीं था, लेकिन जानकारों का मानना है कि फरक्का जलसंधि पर जेडीयू के कड़े रुख के बाद बिहार के हितों से जुड़े इस जल संसाधन के मुद्दे पर आगे की रणनीति पर चर्चा होने की पूरी संभावना थी।
  • ​एनडीए में आपसी समन्वय: फरक्का और अन्य हालिया मामलों पर भाजपा और जेडीयू के बीच सामने आए अलग-अलग बयानों के बाद, सरकार और संगठन के स्तर पर आपसी तालमेल को बनाए रखना भी इस बैठक का एक छिपा हुआ अहम पहलू माना जा रहा था।

​जेडीयू का सख्त रुख: समझौते से इनकार

​पिछले कुछ दिनों से फरक्का जलसंधि बिहार की राजनीति के केंद्र में आ गई है। जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में ऐलान किया है कि पार्टी इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। उन्होंने दो टूक कहा है कि जरूरत पड़ने पर वे सरकार में रहें या न रहें, लेकिन पार्टी अपने रुख से पीछे नहीं हटेगी।
​जेडीयू का आरोप है कि फरक्का जलसंधि की वजह से पिछले 30 सालों से बिहार को लगातार अन्याय का सामना करना पड़ रहा है। एनडीए गठबंधन में शामिल एक प्रमुख सहयोगी दल का इतना आक्रामक रुख सियासी हलकों में बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है।

​संगठनात्मक रणनीति या सियासी संदेश?

​भाजपा भले ही इस बैठक को पूरी तरह से आगामी ‘सेवा संकल्प अभियान’ की तैयारियों से जोड़ रही हो, लेकिन जेडीयू के बयानों के ठीक दो दिन बाद बुलाई गई इस बैठक ने कई राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए थे। फिलहाल बैठक रद्द होने से इन अटकलों पर कुछ वक्त के लिए विराम जरूर लग गया है, लेकिन बिहार के सियासी पटल पर जेडीयू और बीजेपी के बीच की खींचतान आने वाले दिनों में और दिलचस्प मोड़ ले सकती है।