पटना। बिहार की सियासत में महिला आरक्षण बिल को लेकर जारी घमासान अब सड़कों पर उतर आया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के आह्वान पर बुधवार को पूरे प्रदेश में ‘धिक्कार मार्च’ का आयोजन किया गया। NDA घटक दल के रूप में RLM ने विपक्षी गठबंधन (महागठबंधन) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए महिला आरक्षण बिल के मार्ग में बाधा डालने का आरोप लगाया। हालांकि, राजधानी पटना में इस रैली के दौरान एक असहज स्थिति देखने को मिली, जहां महिलाओं के हक की लड़ाई में महिलाओं की भागीदारी ही नगण्य रही।
पटना में रैली का फीका आगाज: न पत्नी दिखीं, न बहू
पटना में आयोजित धिक्कार रैली में उस वक्त चर्चाएं तेज हो गईं जब आयोजन स्थल पर केवल 4 महिलाएं ही नजर आईं। हैरानी की बात यह रही कि पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी और बहू भी इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बनीं। जहां एक ओर पार्टी महिलाओं को 33% आरक्षण दिलाने की बात कर रही है, वहीं राजधानी में महिलाओं की इतनी कम उपस्थिति ने विरोधियों को चुटकी लेने का मौका दे दिया। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि उपेंद्र कुशवाहा खुद पटना के मार्च में शामिल होकर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा सकते हैं।
जिलों में दिखा असर: राहुल गांधी का फूंका पुतला
राजधानी के उलट, बिहार के अन्य जिलों में RLM कार्यकर्ताओं का आक्रोश साफ देखने को मिला। खगड़िया में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनका पुतला दहन किया। समस्तीपुर में बड़ी संख्या में महिलाएं हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर सड़कों पर उतरीं। उन्होंने विपक्षी दलों पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाते हुए मार्च निकाला। नालंदा, औरंगाबाद और लखीसराय जैसे जिलों में भी स्थानीय नेताओं के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया गया।
महागठबंधन ने छीना महिलाओं का हक
RLM नेताओं ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के खिलाफ मतदान करना महागठबंधन की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। पार्टी के अनुसार, इस बिल के रुकने से विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं को मिलने वाले 33% प्रतिनिधित्व का रास्ता बाधित हो गया है। RLM का स्पष्ट कहना है कि यह मार्च केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक जनजागरूकता अभियान है, ताकि जनता जान सके कि कौन से दल महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखना चाहते हैं।
आर-पार की लड़ाई का ऐलान
प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने संकल्प दोहराया कि जब तक महिलाओं को उनका उचित हक और प्रतिनिधित्व नहीं मिल जाता, तब तक सड़क से लेकर संसद तक यह आंदोलन जारी रहेगा। पार्टी ने इसे महिलाओं के सम्मान की लड़ाई करार दिया है।
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