वीरेंद्र कुमार, नालंदा। बिहारशरीफ मॉडल अस्पताल फिर एक बार अपने कारनामों की वजह से सुर्खियों में है। इस बार कुत्ते के काटने के बाद एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचे मरीज ने अस्पताल की व्यवस्था और इंजेक्शन लगाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

मरिजों को होती हैं तरह-तरह की परेशानियां

मरीज आशीष कुमार का आरोप है कि पुर्जा बनवाने के बाद जब वह इंजेक्शन लेने काउंटर पर जाते हैं, तो उन्हें एक बार में पूरी जानकारी नहीं दी जाती। हर बार इंजेक्शन लगवाने के लिए काउंटर पर जाने पर अलग-अलग तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि कभी एक चीज लाने को कहा जाता है, तो कभी दूसरी, जिससे मरीजों को काफी परेशानी होती है।

आशीष कुमार ने कहा कि वह खुद भी यहां के छात्र रह चुके हैं और मरीजों को नियम-कानून की जानकारी देकर परेशान न करने की बात कही जाती है, लेकिन अस्पताल में काम करने के दौरान उन्हीं नियमों के पालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इंजेक्शन लगाते समय नहीं पहना था ग्लव्स

मरीज द्वारा बनाए गए वीडियो में दावा किया गया है कि इंजेक्शन लगाने के दौरान स्वास्थ्यकर्मी ने ग्लव्स नहीं पहने और इंजेक्शन लगाने वाली जगह पर स्पिरिट का इस्तेमाल भी नहीं किया गया। मरीज ने सवाल उठाया कि अगर इलाज के दौरान संक्रमण फैल जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?

मॉडल अस्पताल को लेकर उठ रहा सवाल

वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर मॉडल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. जय प्रकाश सिंह ने बताया कि उन्हें फिलहाल इस मामले की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे में अब देखना होगा कि जांच के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है और मरीजों को बेहतर एवं सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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