वीरेंद्र कुमार, नालंदा। बिहार शरीफ को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए भले ही बड़े-बड़े दावे किए जाते हों और जलजमाव से मुक्ति के नाम पर अनगिनत बैठकें होती हों, लेकिन हकीकत इन दावों की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है। शनिवार की रात महज 15 मिनट की झमाझम बारिश ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी, जिससे शहर के कई इलाके कुछ ही पलों में तालाब में तब्दील हो गए।
प्रमुख इलाकों में जलजमाव और जनजीवन अस्त-व्यस्त
बारिश शुरू होते ही बिचली खंदक, पुलपर, टेलीफोन एक्सचेंज, अंबेर मोड़, रांची रोड और कटरा बाजार समिति जैसे प्रमुख इलाकों में सड़कों पर सैलाब आ गया। स्थिति इतनी भयावह थी कि लोग घुटनों तक गंदे पानी के बीच से गुजरने को मजबूर दिखे। कहीं हाथ में दूध का बर्तन लिए महिला इस पानी को पार कर रही थी, तो कहीं ठेला और गुब्बारा बेचने वाले इसी गंदे पानी के बीच अपनी रोजी-रोटी चलाने को विवश थे।



व्यावसायिक इलाकों में डूबे वाहन
सबसे बदतर हालात शहर के व्यावसायिक क्षेत्रों में देखने को मिले। आदित्य विजन के बाहर खड़ी दर्जनों मोटरसाइकिलें पानी में आधी डूबी नजर आईं। सड़क पर चल रहे दोपहिया वाहन और रिक्शे गहरे पानी को चीरकर आगे बढ़ते दिखे, जिसे देखकर ऐसा लग रहा था मानो लोग सड़क पर नहीं बल्कि किसी उफनती नदी में सफर कर रहे हों।
कागजी दावे और प्रशासनिक नाकामी
हैरानी की बात यह है कि इस बारिश से ठीक पहले नगर निगम की ओर से मुकम्मल तैयारियों के दावे किए गए थे। नगर आयुक्त कृत्यानंद रंजन की अध्यक्षता में हुई बैठक में खुले नालों की सूची मांगने, जलनिकासी पर जोर देने और पंपिंग सेट दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए थे। महापौर की अगुवाई वाली सशक्त स्थायी समिति की बैठक में भी ब्रह्म स्थान, देवीसराय, खंदकपर और शिवपुरी जैसे संवेदनशील इलाकों में पंपिंग सेट लगाने की बात कही गई थी।
जनता का सीधा सवाल
नगर निगम के तमाम दावों के विपरीत जमीन पर केवल पानी ही पानी नजर आया। अब बिहार शरीफ की जनता के मन में यह सवाल सुलग रहा है कि अगर नाले साफ थे और प्रशासन अलर्ट था, तो महज 15 मिनट की बारिश ने शहर को झील क्यों बना दिया? क्या विकास के ये दावे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेंगे?


