पटना। बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग ने राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने एक व्यापक स्थानांतरण नीति के तहत 151 बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों (CDPO) का तबादला कर दिया है। बुधवार को जारी आधिकारिक अधिसूचना के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य आईसीडीएस (ICDS) की योजनाओं को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी तरीके से क्रियान्वित करना है।

​मुख्यालय और फील्ड के बीच नई तैनाती

​इस फेरबदल की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी में मुख्यालय में लंबे समय से कार्यरत अधिकारियों को फील्ड पोस्टिंग दी गई है ताकि वे जमीनी चुनौतियों को बेहतर समझ सकें। अधिसूचना के अनुसार मुख्यालय में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत सुमन सिन्हा को अब पूर्वी चंपारण के आदापुर में सीडीपीओ के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी प्रकार, बिहार बाल अधिकार आयोग में अपनी सेवाएं दे रहीं अनिता को बक्सर जिले के राजपुर में सीडीपीओ के पद पर तैनात किया गया है। रंजना सिन्हा को भोजपुर जिले के पीरो ब्लॉक की जिम्मेदारी दी गई है।

​पटना समेत प्रमुख जिलों में बड़ा बदलाव

​स्थानांतरण सूची में पटना और उसके आसपास के क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। भोजपुर के कोईलवर में पदस्थापित रहीं सीडीपीओ सुषमा कुमारी को पटना सदर भेजा गया है। वहीं औरंगाबाद के गोह से ओनम को फतुहा का सीडीपीओ बनाया गया है। मुंगेर सदर की कमान संभाल रहीं रंजना सिन्हा अब पटना ग्रामीण क्षेत्र के विकास कार्यों को देखेंगी। इन बदलावों के माध्यम से विभाग ने प्रशासनिक कसावट लाने का प्रयास किया है।

​आईसीडीएस निदेशालय में हुआ फेरबदल

​प्रशासनिक बदलाव केवल जिलों तक सीमित नहीं रहे हैं। विभाग ने आईसीडीएस निदेशालय में भी महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं। मुजफ्फरपुर के मुशहरी सदर में तैनात रहे सीडीपीओ संजीव प्रियदर्शी को पदोन्नति/स्थानांतरण के तहत आईसीडीएस निदेशालय में सहायक निदेशक के पद पर पदस्थापित किया गया है। विभाग के आला अधिकारियों का मानना है कि इस फेरबदल से योजनाओं के संचालन और प्रशासनिक समन्वय में गति आएगी।

​प्रभावी क्रियान्वयन का लक्ष्य

​समाज कल्याण विभाग ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपने नए कार्यस्थल पर योगदान देने का निर्देश दिया है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि एक ही स्थान पर लंबे समय तक पदस्थापित रहने से प्रशासनिक शिथिलता आती है जिसे दूर करना और जनहित की योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना इस स्थानांतरण का मूल उद्देश्य है। उम्मीद है कि नई नियुक्तियों के बाद योजनाओं की निगरानी और लाभार्थियों तक लाभ पहुंचने की प्रक्रिया में और अधिक पारदर्शिता आएगी।