कुंदन कुमार/ पटना‌। ​बिहार की राजनीति में टेंडर घोटाले को लेकर कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने सत्ताधारी गठबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर माफिया रिशु श्री के काले कारनामों की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं, लेकिन सरकार की चुप्पी कई गंभीर शंकाओं को जन्म दे रही है। राठौड़ ने स्पष्ट किया कि रिशु श्री ने सिस्टम को मैनेज कर करोड़ों की अवैध कमाई की है।

​एक अन्ने मार्ग से संचालित हो रहा खेल

​राजेश राठौड़ ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि यह पूरा खेल एक अन्ने मार्ग (मुख्यमंत्री आवास) के इर्द-गिर्द संचालित होता रहा है। उन्होंने दावा किया कि रिशु श्री केवल एक चेहरा है, जिसके पीछे बड़े रसूखदार अधिकारी खड़े हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि यह तथाकथित टेंडर माफिया न केवल टेंडर दिलवाने का काम करता था, बल्कि अधिकारियों की पोस्टिंग में भी मुख्य भूमिका निभाता था। टेंडर के कमीशन का बंटवारा भी इन्हीं अधिकारियों और माफिया के बीच होता था।

​अधिकारियों को एक्सटेंशन का रहस्य क्या है?

​कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रदेश सरकार द्वारा लगातार रिटायर्ड अधिकारियों को दिए जा रहे सेवा विस्तार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसे कौन से कारण हैं कि दागी और पुराने अधिकारियों को पद पर बनाए रखने के लिए सरकार इतनी लालायित है? क्या यह सब इसलिए हो रहा है ताकि टेंडर घोटाले से जुड़े सबूतों को मिटाया जा सके और मुख्य दोषियों को बचाया जा सके? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूरी तरह से दोषियों को संरक्षण देने के काम में जुटी हुई है।

​क्या है कांग्रेस की मांग?

​राजेश राठौड़ ने मांग की है कि नीतीश कुमार को सबसे पहले उन सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटाना चाहिए जिनका नाम रिशु श्री की सहायता करने में सामने आया है। उन्होंने जोर दिया कि जनता को इन सारे सवालों का जवाब चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच नहीं कराई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की तो राज्य में भ्रष्टाचार का यह खेल और अधिक विकराल रूप ले लेगा।
​यह मामला अब बिहार की प्रशासनिक पारदर्शिता और शासन की कार्यशैली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहा है। क्या सरकार इस भ्रष्टाचार के भंवर को तोड़ पाएगी या फिर जांच केवल कागजों तक सीमित रहेगी, यह आने वाला समय ही बताएगा।