Bihar News: सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के बिहार में शुरू किए गए मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) के निर्णय को बरकरार रखा है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह फैसला दिया है कि SIR प्रक्रिया को सिर्फ इसलिए ‘अल्ट्रा वायर्स’ (गैर-कानूनी) कहकर रद्द नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह वोटर लिस्ट के आम रिवीज़न की प्रक्रिया से अलग है। कोर्ट ने SIR को एक वैध और संवैधानिक प्रक्रिया बताया और कहा कि, यह प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है।

राजद सांसद का बयान

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर RJD सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि, सुप्रीम कोर्ट से हमें उम्मीद थी। हमारी चिंता थी कि आज भी लाखों लोग बंगाल में बाहर हैं। हमारा ‘समावेशन के बजाय, बहिष्कार’ की प्रक्रिया पर सवाल था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है तो देखते हैं। इसमें और क्या कह सकते हैं।

चुनाव आयोग फेयर तरीके से कराया SIR- सुप्रीम कोर्ट

याचिकाकर्ता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि, आज सुप्रीम कोर्ट ने SIR ऊपर फैसला सुनाया है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि SIR की प्रक्रिया पूरी सही है और SIR कराना चुनाव आयोग का काम है, उन्होंने जो कराया वो बिल्कुल ठीक कराया है, जो SIR के बारे में बहुत सारी कमियां बताई गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने उस कमियों को स्वीकार नहीं किया है और कहा कि चुनाव आयोग फेयर तरीके से SIR कराया है। हमने याचिका जो की थी उसमें मांग किया था कि SIR नियमित अंतराल पर होना चाहिए। SIR हर 5 साल में होते रहना चाहिए क्योंकि एक भी विदेशी व्यक्ति का नाम है, तो वो पूरी तरीके से चुनाव आयोग के खिलाफ है।

वोटर लिस्ट में नहीं होगा घुसपैठिए का नाम- याचिकाकर्ता

अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि, आज सुप्रीम कोर्ट ने हमारी और चुनाव आयोग की जो दलील थी, उसको स्वीकार कर लिया है और जो SIR के खिलाफ और उसके कमी के बारे में याचिक फाइल की गई थी, उसे नाकार दिया है। मैं आशा करता हूं कि आने वाले समय में घुसपैठिए और बांग्लादेशी का नाम वोटर लिस्ट में नहीं होगा। उन्होंने आदेश दिया है जिनका नाम 2003 में हुए SIR के दौरान हटा दिया गया था, उन सभी की नागरिकता की स्थिति के सत्यापन के लिए उचित न्यायाधिकरणों को भेजे जाएं।

नाम कटने से व्यक्ति विदेशी नहीं

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान केवल नाम हटा दिया जाना, अपने आप में, यह निर्णायक रूप से साबित नहीं करता कि वह व्यक्ति एक विदेशी नागरिक है। सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि विचाराधीन ग्यारह दस्तावेज उचित हैं और किसी भी नियम या कानून का उल्लंघन नहीं करते हैं, इसके अलावा, चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित ग्यारह दस्तावेज़ों का यह समूह उपयुक्त माना गया है। आधार के संबंध में कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई। इसे न तो अनिवार्य घोषित किया गया और न ही अस्वीकार किया गया।

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