वीरेंद्र कुमार, नालंदा‌‌। बिहारशरीफ में स्मार्ट सिटी योजना के तहत विकास के दावों की पोल महज 15 से 20 मिनट की झमाझम बारिश ने खोल दी है। गया-बिहारशरीफ मार्ग स्थित एनएच-82 का राणा बीघा बाईपास पहली ही बारिश में जलमग्न होकर तालाब में तब्दील हो गया। सड़क पर घुटनों तक पानी भर जाने के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ा।

​यातायात व्यवस्था ठप और वाहन चालकों की फजीहत

​बारिश के बाद राणा बीघा बाईपास से गुजरने वाले दर्जनों वाहन पानी में फंस गए। कई मोटरसाइकिलें और ऑटोरिक्शा जलभराव के बीच बंद पड़ गए, जिन्हें स्थानीय नागरिकों की मदद से धक्का देकर बाहर निकाला गया। सड़क पर पानी का सैलाब आने से वाहनों की रफ्तार पूरी तरह थम गई और लंबा जाम लग गया। पैदल चलने वाले लोगों के लिए सड़क पार करना भी जोखिम भरा साबित हुआ।

​धंधा चौपट और स्थानीय लोगों का आक्रोश

​सड़क किनारे स्थित दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में पानी घुसने से दुकानदारों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। स्थानीय लोगों ने नगर निगम और प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। नागरिकों का सीधा आरोप है कि प्री-मानसून और नालों की सफाई के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की जाती है, जिसके कारण थोड़ी सी बारिश में भी जलजमाव की विकराल समस्या उत्पन्न हो जाती है। लोगों ने जिला प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान की पुरजोर मांग की है।

​शहर के अन्य इलाकों का भी बुरा हाल

​राणा बीघा बाईपास अकेला ऐसा क्षेत्र नहीं है, बल्कि बिहारशरीफ के कई अन्य प्रमुख इलाके भी बारिश के पानी में डूब गए। बिचली खंदक, पुल के आसपास का क्षेत्र, टेलीफोन एक्सचेंज भैंसासुर, अंबेर मोड़, रांची रोड और बाजार समिति कतरा समेत कई इलाकों में जलजमाव की गंभीर स्थिति देखने को मिली। कुछ मिनटों की बारिश ने जब शहर के बुनियादी ढांचे की यह हालत कर दी है, तो आगामी मूसलाधार मानसून सत्र में शहर की क्या स्थिति होगी, यह सोचकर ही आम जनता सिहर उठती है।
​स्मार्ट सिटी के नाम पर खर्च हो रहे करोड़ों रुपये और जलनिकासी के खोखले दावों के बीच यह जमीनी हकीकत प्रशासन के दावों पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है। अब यह देखना दिलचस्प और लाजिमी होगा कि संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन इस नाकामी से सबक लेते हुए जलजमाव की इस नासूर बन चुकी समस्या से निजात दिलाने के लिए कब तक ठोस और प्रभावी कदम उठाते हैं।