वीरेंद्र कुमार, नालंदा। बिहारशरीफ शहर के लहेरी थाना के ठीक सामने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बने 78 करोड़ रुपये के नए फ्लाईओवर पर एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। पक्की तालाब मोहल्ले के निवासी मो. रियाज की 14 वर्षीय बेटी अरसी फलक फ्लाईओवर से नीचे गिर गई, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
​घटना की सूचना मिलते ही लहेरी थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से घायल बच्ची को पुलिस जीप के जरिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों के अनुसार बच्ची की जान बाल-बाल बच गई है, लेकिन उसके दोनों पैरों और एक हाथ में गंभीर फ्रैक्चर हुआ है। उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए अन्यत्र रेफर कर दिया गया है। लहेरी थानाध्यक्ष रंजीत कुमार रजक ने बताया कि पुलिस मामले की हर पहलू से गहन जांच कर रही है।

​मानसिक तनाव और घरेलू कलह की बात आई सामने

​अस्पताल में उपचाराधीन अरसी ने शुरुआती बातचीत में खुलासा किया कि वह पिछले कुछ समय से भारी मानसिक तनाव में थी। उसने अपनी बड़ी विवाहित बहन फरहीन परवीन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बहन द्वारा लगातार गलत आरोप लगाए जाने और ताने देने के कारण उसने यह खौफनाक कदम उठाया। हालांकि, पुलिस इन पारिवारिक आरोपों की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने के लिए विस्तृत जांच कर रही है।

​78 करोड़ की लागत और सुरक्षा पर गंभीर सवाल

​यह आधुनिक फ्लाईओवर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लगभग 78 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से निर्मित किया गया है। करीब 1.5 किलोमीटर लंबा यह मार्ग एलआईसी मोड़ से भरावपर होते हुए सोगरा कॉलेज तक जाता है, जिसका उद्घाटन इसी वर्ष 26 मार्च को हुआ था।
​इस घटना के बाद से फ्लाईओवर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों और कारोबारियों का आरोप है कि इसके कई हिस्सों में रेलिंग की ऊंचाई काफी कम है, जो सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरती। इसके अलावा, फ्लाईओवर के पास बने मकानों की अत्यधिक नजदीकी भी एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। नालंदा चैंबर ऑफ कॉमर्स और विपक्षी दलों ने भी पहले सुरक्षा इंतजामों को लेकर आवाज उठाई थी।

​तकनीकी ऑडिट की उठी मांग

​कुछ समय पूर्व फ्लाईओवर के पास बिखरी बालू-गिट्टी को लेकर सफाई कराई गई थी, लेकिन इस ताज़ा हादसे ने साबित कर दिया है कि केवल सतही सफाई से काम नहीं चलेगा। अब यह अनिवार्य हो गया है कि पूरे फ्लाईओवर का एक उच्च स्तरीय तकनीकी ऑडिट कराया जाए। जनता और प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि संबंधित विभागों को इस दुर्घटना को एक गंभीर चेतावनी के रूप में लेते हुए रेलिंग और बैरिकेडिंग जैसे सुरक्षा उपायों की तत्काल समीक्षा करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी अनहोनी को पूरी तरह रोका जा सके।