अमृतसर। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ अमृतसर में दर्ज एफआईआर को लेकर कानूनी विवाद और गहरा गया है। मजीठिया की कानूनी टीम ने एफआईआर की प्रमाणित कॉपी हासिल करने के लिए अब अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पुलिस को तुरंत एफआईआर की कॉपी आरोपी और अदालत को सौंपने के निर्देश जारी किए हैं।
छापेमारी के दौरान बताया एफआईआर नंबर, पर नहीं दी कॉपी
मजीठिया के वकील अमनबीर सिंह सियाली ने मीडिया से बातचीत में बताया कि महीने की पहली तारीख को जब पुलिस ने बिक्रम सिंह मजीठिया के आवास पर छापेमारी की थी, तो वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों ने मौखिक रूप से जानकारी दी थी कि मजीठिया के खिलाफ एफआईआर नंबर 91 दर्ज की गई है। हालांकि, बार-बार मांगने के बावजूद उन्हें इसकी कोई कॉपी नहीं दी गई।
कोर्ट ने पुलिस से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, सरकारी वकील से पूछा- क्यों नहीं की ऑनलाइन अपलोड?
वकील सियाली ने बताया कि इस प्रशासनिक ढुलमुल रवैए के खिलाफ उन्होंने 1 जून को अदालत में एक याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित थाना प्रभारी (SHO) को नोटिस जारी कर स्टेटस रिपोर्ट तलब की थी। इसके बावजूद पुलिस 2 तारीख तक भी अदालत में एफआईआर की कॉपी पेश करने में नाकाम रही। इस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकारी वकील से स्पष्टीकरण मांगा कि निर्धारित नियमों के तहत एफआईआर को अब तक ऑनलाइन अपलोड और कोर्ट में पेश क्यों नहीं किया गया।
ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने जारी किए निर्देश, अवमानना की दी चेतावनी
मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्यूटी मजिस्ट्रेट नीलम ने पुलिस को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने आदेश दिया है कि एफआईआर की एक कॉपी तुरंत संबंधित आरोपी और उनके वकीलों को उपलब्ध कराई जाए, साथ ही इसकी एक प्रति अदालत में भी पेश की जाए।

आगे की कानूनी रणनीति
मजीठिया की लीगल टीम अब अदालत के इस आदेश की कॉपी लेकर मजीठा पुलिस स्टेशन जाएगी ताकि एफआईआर की कॉपी हासिल की जा सके। वकील ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने अब भी अदालत के आदेशों का पालन नहीं किया, तो इसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा और इसके खिलाफ आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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