Bilaspur News Update : बिलासपुर. हाईकोर्ट में ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले रोस्टर में बदलाव किया गया है. आगामी गुरूवार 7 मई से चार डिवीजन बेंचों और 14 सिंगल बेंचों में नियमित सुनवाई की जाएगी. आज जारी रोस्टर के अनुसार पहली डीबी में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल रिट अपील, हेबियस कार्पस, पीआईएल, अपराधिक अवमानना, विशेष मामलों की सुनवाई करेंगे. जस्टिस संजय के अग्रवाल व जस्टिस संजय कुमार जायसवाल. की दूसरी डीबी में सभी क्रिमिनल मामले जो किसी अन्य डीबी में नहीं भेजे गए हों और वर्ष 2022 तक के अल्ट्रा वायरस मैटर सुने जायेंगे . जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस एन के व्यास की तीसरी डीबी में सभी इक्विटल अपीलें सन 2016 से लेकर अब तक सुनी जानी हैं. इसी तरह चौथी डिवीजन बेंच में जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत डीबी के सभी सिविल मामले जो किसी अन्य डीबी में न गए हों सुने जायेंगे . यही डीबी मेट्रीमोनियल फर्स्ट अपील, टेक्स मामले, आर्टिकल 323 ए और 323बी के तहत सभी रिट मामले सुनेगी. इसके साथ ही चीफ जस्टिस की स्पेशल बेंच समेत 14 सिंगल बेंचों में भी सुनवाई की जाएगी .

अलार्म चेन का दुरुपयोग पर 501 यात्रियों से वसूला गया 2 लाख जुर्माना

बिलासपुर. रेल यात्रियों की सुरक्षा और आपात स्थिति में त्वरित मदद के लिए भारतीय रेलवे द्वारा हर कोच में इमरजेंसी अलार्म चेन की सुविधा दी जाती है, लेकिन इसके दुरुपयोग के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. रेल मंडल में जनवरी से अप्रैल के बीच अलार्म चेन पुलिंग के 501 मामले दर्ज किए गए हैं. जिससे रेल संचालन पर असर पड़ रहा है.

मंडल रेल प्रबंधक राकेश रंजन के मार्गदर्शन और मंडल सुरक्षा आयुक्त सौरभ कुमार के नेतृत्व में रेलवे सुरक्षा बल ने इस पर सख्त रुख अपनाया है. ट्रेनों में अनावश्यक चेन पुलिंग को रोकने के

लिए लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है. रेलवे द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इन 501 मामलों में रेलवे अधिनियम की धारा 141 के तहत कार्रवाई करते हुए न्यायालय के माध्यम से 1 लाख 92 हजार रुपये का जुमार्ना वसूला गया है. रेल अधिनियम के अनुसार, बिना उचित कारण अलार्म चेन खींचना दंडनीय अपराध है. इसमें एक वर्ष तक की सजा, 1 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है. रेल प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे इस सुविधा का उपयोग केवल वास्तविक आपात स्थिति में ही करें. अनावश्यक चेन पुलिंग न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि इससे ट्रेनों की समयबद्धता और अन्य यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है.

मामूली विवाद पर गला दबाकर हत्या 

जांजगीर-चांपा. शराब के नशे में पत्नी व बच्चों से बहस के बाद घर से निकले व्यक्ति की गांव में ही चौथे दिन लाश मिली. संदिग्ध मामला पत्नी, बच्चों के साथ मानकर बहस के बाद चला गया था घर से, तीन पुलिस जांच कर रही थी. पतासाजी के दिन बाद मिली लाश दौरान मृतक के ससुराल लोगों ने किया मर्डर, पक्ष के लोगों दो आरोपी पकड़े गए ससुराल पक्ष के द्वारा डंडे से मारकर व गला दबाकर हत्या की गई थी. पामगढ़ पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार जगदीश प्रजापति अपनी पत्नी दिव्या और डेढ़ वर्षीय बेटे के साथ 29 अप्रैल को रिश्तेदार के विवाह कार्यक्रम में शामिल होने खरखोद गांव आया था. रात करीब 11:30 बजे वह शराब के नशे में अपनी पत्नी और बच्चे के साथ विवाद करने लगा. बच्चे के ऊपर पैर रखने और गाली-गलौज करने पर पत्नी ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन विवाद बढ़ गया. इसके बाद जगदीश घर छोड़कर गांव में ही एक अन्य स्थान पर जाकर सो गया, सुबह पता किया तो वहां पर नहीं था, आसपास पता किया तो भी पता नहीं चला. 3 मई को उसका शव गांव में एक घर के पीछे दीवार के पास संदिग्ध हालत में मिला, जिसके शरीर में सड़न शुरू हो चुकी थी. सूचना पर मर्ग कायम कर जांच पंचनामा कार्रवाई में लिया गया. शव का पीएम कराया गया, पीएम रिपोर्ट के आधार पर, थाना पामगढ में अपराध धारा 103 (1) भारतीय न्याय संहिता पंजीबद्ध कर विवेचना कार्रवाई में लिया गया. पतासाजी में यह बात सामने आई कि आरोपी देसाई कुम्हार व रामनारायण प्रजापति जो मृतक के ससुराल पक्ष के रिश्तेदार है इनके द्वारा को पकड़ा गला दबाकर, डंडा, हाथ मुक्का से मारपीट कर हत्या की गई है. आरोपी देसाई कुम्हार पिता जयसिंह उम्र 42 साल निवासी खरखोद थाना पामगढ़, रामनारायण प्रजापति पिता जयसिंह उम्र 44 साल निवासी ठाकुरदेवा चौकी मल्हार थाना मस्तूरी जिला बिलासपुर के विरूद्ध धारा 103 (1), 238, 3(5) बीएनएस के तहत कार्रवाई कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है.

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समाधान शिविर के सामने कांग्रेसियों ने की नारेबाजी

रायगढ़. जिले के बोइरदादर स्थित विनोबा नगर में आयोजित समाधान शिविर के सामने मंगलवार को जिला शहर कांग्रेस कमेटी ने प्रदर्शन कर राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. कांग्रेस कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां लेकर शिविर स्थल पहुंचे और आम जनता की समस्याओं के निराकरण में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा. प्रदर्शनकारियों ने शासन पर तीखी बयानबाजी करते हुए कहा कि ये शिविर महज एक दिखावा और औपचारिकता बनकर रह गए हैं. विरोध का मुख्य आधार पिछले वर्ष आयोजित सुशासन तिहार बनाया गया, जिसके लंबित आवेदनों का निराकरण आज तक नहीं हो सका है. कांग्रेस नेताओं के अनुसार जब पुराने आवेदनों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. तो नए शिविरों का आयोजन जनता को गुमराह करने के अलावा और कुछ नहीं है.

योजनाओं की विसंगतियों को उजागर करते हुए शहर कांग्रेस अध्यक्ष शाखा यादव ने बताया कि आयुष्मान कार्ड और महतारी वंदन योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक नहीं पहुंच पा रहा है. सबसे गंभीर स्थिति सामाजिक सुरक्षा पेंशन को लेकर सामने आई है. जहां वृद्धावस्था विधवा और दिव्यांग पेंशन कई महीनों से लंबित होने के कारण आश्रितों के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है. साथ ही भूमिहीन गरीबों को न तो आवास योजना का लाभ मिल रहा है और न ही उन्हें नजूल भूमि का मालिकाना हक दिया जा रहा है.

प्रशासनिक अव्यवस्था पर निशाना साधते हुए विपक्षी दल ने कहा कि जनगणना और इन समाधान शिविरों में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई है. इससे सरकारी कार्यालयों का नियमित कामकाज ठप पड़ गया है और अपने छोटे छोटे कामों के लिए दफ्तर पहुंचने वाली आम जनता को बैरंग लौटना पड़ रहा है. विरोध के दौरान सरकार की नियत पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया कि गरीबों के हितों की बात करने वाली यह सरकार असल में चंद उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का काम कर रही है. कांग्रेस ने स्पष्ट मांग की है कि पहले से लंबित पड़े आवेदनों का त्वरित निराकरण किया जाए और जनहित की योजनाओं को पारदर्शी तरीके से अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जाए. इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे.

वन कर्मचारी संघ ने स्थानांतरण नीति के खिलाफ खोला मोर्चा

कोरबा. वन विभाग के बिलासपुर वृत्त मे स्थानांतरण नीति की अनदेखी की जा रही है. कार्यालय द्वारा वन विभाग के मैदानी अमले का प्रतिबंधित अवधी में भी स्थानांतरण किया जा रहा है. मामले में चर्चा के बावजूद ठोस पहल नही करेंगे कर्मचारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है. संघ निराकरण नही होने पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का अल्टीमेटम दिया है. इसके बाद भी बात नही बनी तो अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान किया गया है.

इस आशय का पत्र छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ संभाग बिलासपुर के अध्यक्ष प्रीतम पुराईन ने मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर वृत्त को पत्र लिखा है. उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि वन विभाग में मैदानी अमले के अधिकारी कर्मचारी के स्थानांतरण पर प्रतिबंधित अवधी में स्थानांतरण पर सामान्य प्रशासन विभाग ने असहमति व्यक्त किया है. बावजूद इसके कार्यालय व अधिनस्थ वन मंडल कार्यालयों द्वारा कार्य संपादन व आबंटन के नाम पर नियम विरूद्ध अनावश्यक रूप से स्थानांतरण किया जा रहा है. कार्य आबंटन व अन्य कारणों से नियम विरूद्ध स्थानांतरण का छग वन कर्मचारी संघ संभाग बिलासपुर घोर निदां करता है. आपके और आपके कार्यालय द्वारा ऐसे समस्त प्रकार के नियम विरूद्ध जारी स्थानांतरण आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए. संघ द्वारा पिछले परामर्शदात्री बैठक व समय समय पर मौखिक चर्चाओ में आपके द्वारा सार्थक पहल का आश्वासन दिया गया था, लेकिन किसी तरह की कार्रवाई नही की गई. यदि समस्या का सात दिवस के भीतर निराकरण नही किया जाता है, तो एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया जाएगा. इसके बाद भी समस्या का निराकरण नही होने पर छग वन कर्मचारी संघ संभाग बिलासपुर अनिश्चितकालीन आंदोलन के लिए बाध्य होगा. जिसकी संपूर्ण जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी.