Odisha Desk, भुवनेश्वर: ओडिशा की राजनीति में एक बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) सुरामा पाढ़ी ने बीजू जनता दल (बीजद) को बड़ा झटका दिया है। स्पीकर ने बीजद द्वारा अपने ही कई विधायकों के खिलाफ दायर की गई अयोग्यता याचिकाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है। बीजद ने इन विधायकों पर मार्च 2026 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने का गंभीर आरोप लगाया था।

बीजद के प्रतिनिधिमंडल ने विपक्षी मुख्य सचेतक प्रमिला मल्लिक के नेतृत्व में 25 अप्रैल 2026 को विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की थी। पार्टी ने भारत के संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के पैराग्राफ 2(1)(a) का हवाला देते हुए कुल आठ विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग करते हुए औपचारिक याचिकाएं सौंपी थीं। इस नियम के तहत किसी सदस्य को तब अयोग्य ठहराया जा सकता है जब वह स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ देता है या पार्टी के निर्देशों (व्हिप) के खिलाफ जाता है। हालांकि, सभी पक्षों को सुनने और कानूनी पहलुओं की जांच के बाद स्पीकर सुरामा पाढ़ी ने इन याचिकाओं को अमान्य घोषित कर दिया।

इन विधायकों को मिली बड़ी राहत

स्पीकर के इस फैसले से उन सभी आठ विधायकों को बड़ी राहत मिली है जो इस राजनीतिक विवाद के केंद्र में थे। इनमें से छह विधायकों को राज्यसभा चुनाव में कथित तौर पर क्रॉस वोटिंग करने के तुरंत बाद बीजद द्वारा निलंबित कर दिया गया था:

  • चक्रामाणी कन्हेर (बालीगुडा)
  • नबा किशोर मल्लिक (जयदेव)
  • सौभिक बिस्वाल (चौद्वार-कटक)
  • सुबासिनी जेना (बस्ता)
  • रमाकांत भोई (तिर्तोल)
  • देवी रंजन त्रिपाठी (बांकी)

इसके अतिरिक्त, दो अन्य विधायकों- अरविंद महापात्र (पाटकुरा) और सनातन महाकुड़ (चंपुआ)के खिलाफ भी याचिका दायर की गई थी, जिन्हें दलबदल विरोधी कार्यवाही शुरू होने से पहले ही पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित किया जा चुका था। इन सभी विधायकों की विधानसभा सदस्यता अब पूरी तरह सुरक्षित है।

विधानसभा अध्यक्ष का यह फैसला बीजद के लिए एक रणनीतिक और राजनीतिक विफलता माना जा रहा है। पार्टी राज्यसभा चुनाव में अपने और कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार दत्तेश्वर होता की हार और भाजपा समर्थित दिलीप राय की अप्रत्याशित जीत के बाद से ही बागियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के मूड में थी। विधायकों ने अपने बचाव में दलील दी थी कि राज्यसभा चुनाव में व्हिप जारी करना और उसके आधार पर सदस्यता रद्द करने की मांग करना वैधानिक रूप से सही नहीं है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य की सियासत में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच खींचतान चरम पर है। बागी विधायकों को मिली इस राहत के बाद बीजद के भीतर का आंतरिक असंतोष और गहरा सकता है, जबकि सत्तारूढ़ खेमे को इससे मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलने की उम्मीद है।

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