भुवनेश्वर : खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) यानी MMDR एक्ट संशोधन को लेकर बीजेडी ने केंद्र सरकार और राज्य की सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मंत्री और बीजेडी नेता अतनु सब्यसाची नायक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ओडिशा के अधिकारों को छीनने का प्रयास कर रही है।

बीजेडी ने दावा किया कि संशोधन के कारण ओडिशा को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम राजस्व का नुकसान होने जा रहा है। इसके बावजूद राज्य सरकार, मुख्यमंत्री और बीजेपी के 20 सांसद इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं। बीजेडी ने सवाल उठाया कि जब अन्य राज्य और कई बीजेपी शासित प्रदेश भी अपने राज्यों के नुकसान के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, तब ओडिशा सरकार कोई कदम क्यों नहीं उठा रही है?

अतनु सब्यसाची ने कहा कि जब केंद्र और राज्य के बीच कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो राज्य सरकार के पास मामला दर्ज करने का संवैधानिक अधिकार होता है। बीजेडी ने मांग की कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार को तत्काल कानूनी लड़ाई लड़नी चाहिए।

पूर्ववर्ती नवीन पटनायक सरकार का उदाहरण देते हुए पार्टी ने याद दिलाया कि कैसे पूर्व सरकार ने केंद्र के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी थी। बीजेडी ने इस विधेयक को ‘काला बिल’ करार देते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी नेता इसका विरोध करने के बजाय केवल विपक्ष को निशाना बनाने में व्यस्त हैं।

नवीन पटनायक सरकार के दौरान खदान मालिकों को नोटिस जारी कर लगभग 16,000 करोड़ रुपये वसूले गए थे। वहीं पड़ोसी राज्य झारखंड ने 42,000 करोड़ रुपये की वसूली की है। वर्ष 2014-15 में ओडिशा का खनन राजस्व मात्र 5,000 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर लगभग 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

बीजेडी का दावा है कि यह अभूतपूर्व वृद्धि नवीन पटनायक की बेहतर खनन नीति के कारण संभव हुई। बीजेपी के इस दावे पर कि राजस्व वृद्धि केंद्रीय नियमों की वजह से हुई है, बीजेडी ने पलटवार करते हुए पूछा कि यदि ऐसा है तो अन्य राज्यों में इसी तरह की वृद्धि क्यों नहीं देखी गई?

बीजेडी ने आशंका जताई है कि MMDR एक्ट में संशोधन से ओडिशा के विकास कार्य और जन-कल्याणकारी योजनाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि ‘ओडिया अस्मिता’ का नारा देकर सत्ता में आई बीजेपी अब केंद्र के दबाव में पूरी तरह मौन बैठी है।