चंडीगढ़। हरियाणा में विधानसभा चुनाव से लेकर नगर निगम चुनावों तक भाजपा की लगातार जीत में अहम भूमिका निभाने वाले प्रदेश प्रभारी सतीश पूनिया को पार्टी नेतृत्व ने बड़ा राजनीतिक पुरस्कार दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें राजस्थान से राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित किया है। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।
राजनीतिक हलकों में भाजपा के इस फैसले को हरियाणा में पूनिया के सफल संगठनात्मक प्रबंधन और प्रभावी चुनावी रणनीति की स्वीकारोक्ति के रूप में देखा जा रहा है।
विधानसभा चुनाव से पहले मिली थी बड़ी जिम्मेदारी
भाजपा ने जुलाई 2024 में हरियाणा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सतीश पूनिया को प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया था। उस समय पार्टी के सामने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की चुनौती थी। दस साल की सत्ता विरोधी लहर के बीच भाजपा की राह आसान नहीं मानी जा रही थी, लेकिन पूनिया के नेतृत्व और रणनीति के तहत पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड सीटों के साथ सरकार बनाई और सत्ता की हैट्रिक दर्ज की।
निगम चुनावों में भी कायम रहा विजय अभियान
विधानसभा चुनाव के बाद भी हरियाणा में भाजपा का विजय अभियान जारी रहा। हाल ही में हुए नगर निगम चुनावों में पार्टी ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की। इस दौरान सतीश पूनिया लगातार संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे और प्रदेशभर में कार्यकर्ताओं तथा पदाधिकारियों के साथ संवाद कर पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत करने का काम किया।
संगठन को मजबूत करने में निभाई अहम भूमिका
पूनिया ने प्रदेश में लगातार प्रवास, बैठकों और संगठनात्मक कार्यक्रमों के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाए रखा। उनके मार्गदर्शन में भाजपा ने जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की और चुनावी मशीनरी को प्रभावी ढंग से संचालित किया।
जाट समीकरण साधने की भी रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सतीश पूनिया को राज्यसभा भेजने के पीछे भाजपा की सामाजिक और क्षेत्रीय रणनीति भी काम कर रही है। राजस्थान के निवासी और जाट समुदाय से आने वाले पूनिया की उम्मीदवारी को राज्य की राजनीति में जाट प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भाजपा नेतृत्व के इस फैसले से यह भी संकेत मिला है कि संगठनात्मक स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले नेताओं को पार्टी भविष्य में भी बड़ी जिम्मेदारियां देने के पक्ष में है।

