सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में करीब 19 लाख 14 हजार रुपये के गबन का एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोपी कर्मचारी ने निजी अस्पतालों को दिए खून की राशि सरकारी खजाने के बजाय खुद के खाते में जमा कराई।

हरियाणा। रक्तदान को महादान कहा जाता है, लेकिन अब इसी महादान से जुड़े सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला ऐसा है जिसने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है और शुरुआती जांच में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।

आरोप है कि अस्पताल के ब्लड बैंक में वर्षों से ऐसा खेल चलता रहा, जिसकी भनक किसी को नहीं लगी। जब रिकॉर्ड खंगाले गए तो लाखों रुपये के लेन-देन में गड़बड़ी सामने आई, जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई।

जानकारी के अनुसार, सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में कार्यरत एक लेखाकार पर आरोप है कि उसने निजी अस्पतालों को दिए गए रक्त के बदले मिलने वाली राशि सरकारी खाते में जमा कराने के बजाय अपने निजी खाते में जमा कराई। प्रारंभिक जांच में पिछले तीन वर्षों के दौरान 19 लाख 14 हजार 800 रुपये के कथित गबन की बात सामने आई है।

स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।