प्रमोद कुमार/कैमूर। एक पिता के लिए बेटी की शादी उसके जीवन का सबसे बड़ा सपना और सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। लेकिन जब वही पिता आर्थिक तंगी के कारण अपनों के सामने बेबस हो जाए तो उसके मन पर क्या बीतती है यह शब्दों में बयां करना मुश्किल है। ऐसी ही एक भावुक स्थिति कैमूर जिले के भगवानपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत गोबरछ गांव में देखने को मिली जहां मानवता और दरियादिली की एक मिसाल पेश की गई है।

​अंधेरे में उम्मीद की किरण

गोबरछ गांव निवासी जितेंद्र कुमार भास्कर जो अतिपिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखते हैं, अपनी बेटी की शादी की तैयारियों में जुटे थे। 7 जून को उनकी बेटी के हाथ पीले होने थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। शादी की तारीख नजदीक आते ही पैसों का संकट गहरा गया। जितेंद्र ने अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से लेकर समाज के कई दरवाजे खटखटाए लेकिन हर जगह से निराशा ही हाथ लगी। एक गरीब पिता का कलेजा तब फट जाता है, जब वह अपनी लाड़ली की खुशियों के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होता है।

​बिना शर्त बनी मसीहा की पहचान

जब हर ओर से उम्मीदें टूट रही थीं, तब इस संकट की खबर बसपा के बिहार प्रदेश मुख्य ज़ोन प्रभारी संतोष कुमार तक पहुंची। बिना देर किए मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए संतोष कुमार सीधे जितेंद्र भास्कर के घर पहुंचे। उन्होंने न केवल जितेंद्र की व्यथा सुनी बल्कि बिना किसी शर्त के एक लाख रुपये की नकद सहायता राशि सौंप दी। इस आकस्मिक मदद ने न केवल एक पिता के सिर से चिंता का बोझ कम किया बल्कि उस गरीब परिवार में खुशियों का संचार भी कर दिया।

​इंसानियत आज भी जिंदा है

संतोष कुमार ने तिलक समारोह में स्वयं उपस्थित होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और परिवार को आशीर्वाद दिया। इस दरियादिली से भावुक हुए पिता जितेंद्र कुमार भास्कर ने नम आंखों से संतोष कुमार का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन समय में मिली यह मदद किसी वरदान से कम नहीं है।
​कैमूर की इस घटना ने साबित कर दिया है कि यदि नेक इरादे हों, तो समाज में आज भी लोग एक-दूसरे का संबल बनने के लिए आगे आते हैं। संतोष कुमार की यह पहल न केवल एक परिवार की मदद है, बल्कि समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण भी है जो यह याद दिलाता है कि मानवता सेवा का कोई विकल्प नहीं होता।