Rajasthan News: विश्व धरोहर चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर कानून का डंडा चला। प्रशासन ने उन अवैध निर्माणों को मलबे में तब्दील कर दिया है, जो सालों से किले की शोभा बिगाड़ रहे थे। दो मंजिला इमारतों को ढहाते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।

पुरातत्व विभाग की नींद और भूमाफिया
हैरानी की बात यह है कि 2018 से इन अवैध होटलों और रेस्टोरेंट्स का जाल बिछाया जा रहा था। विभाग के अफसर सिर्फ कागजों में नोटिस भेजकर इतिश्री कर रहे थे। सूत्रों की मानें तो इन निर्माणों के पीछे राजनीतिक रसूख वाले लोग थे, जिनकी वजह से अधिकारी कार्रवाई करने से डरते रहे। अब जिला कलेक्टर डॉ. मंजू की सख्ती ने इस खेल को रोक दिया है।
बावड़ियों का गला घोंट रहे थे ये होटल
किले की असली जान यहाँ के 84 कुंड और बावड़ियां हैं। लेकिन, अवैध कब्जेदारों ने इन जल स्रोतों के रास्तों को ही बंद कर दिया था। रतन सिंह महल के पास का तालाब अब सूखने की कगार पर है। किले के अंदर ऊंची-ऊंची होटलें खड़ा कर विरासत के साथ जो खिलवाड़ किया गया, वह अब प्रशासन की नजरों में है।
आगे क्या है तैयारी?
प्रशासन ने अब मोर्चा खोल दिया है। पुलिस अधीक्षक धमेन्द्र सिंह ने दो टूक कहा है कि अब एक ईंट भी बिना परमिशन के नहीं लगेगी। दुर्ग के अंदर रेत, सीमेंट और पत्थर ले जाने वाली गाड़ियों पर नजर रखी जा रही है। अवैध निर्माण में शामिल लोगों पर नामजद केस दर्ज किए जा रहे हैं। जोधपुर और दिल्ली मुख्यालय से बाकी अवैध ढांचों को गिराने की मंजूरी मिलते ही बड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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