दिल्ली DGHS की प्रमुख डॉ वत्सला अग्रवाल को 21 मई 2026 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, दिल्ली द्वारा जारी एक कार्यालय आदेश के अनुसार, अगले आदेश तक “स्थानांतरण की प्रतीक्षा” में रखा गया था जिसे केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने रोक लगा दी है. डॉ वत्सला अग्रवाल बिना कोई नई पद सौंपे, पोस्टिंग का इंतजार वाली श्रेणी में डाल दिया गया था. नियुक्त किए जाने के लगभग नौ महीने बाद, दिल्ली सरकार ने यह आदेश था।
डॉ वत्सला अग्रवाल ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, दिल्ली द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमे उन्हें पोस्टिंग का इंतजार वाली श्रेणी में डाला गया था.
डॉ अग्रवाल ने “स्थानांतरण की प्रतीक्षा” वाले आदेश को “दंडात्मक” और “मनमाना” कहा. उन्होंने आगे कहा कि इस कारवाई का संबंध स्वास्थ्य विभाग में हाल ही में किए गए एक सतर्कता निरीक्षण से था. केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने सर्वप्रथम पाया कि आदेश में कहा गया है कि डॉ अग्रवाल को अपूरणीय क्षति भी हो सकती है. इसलिए केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण अगली सुनवाई 29 मई 2026 तक तबादले के आदेश के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी है. इस मामले में ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सरकार से जवाब भी मांगी है.

डॉ वत्सला अग्रवाल के वकील ने कहा कि 30 वर्षों से अधिक की सेवा के दौरान कभी भी कोई उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही आज तक नहीं हुई है. उन्होंने सतर्कता अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग किया, और जो डाटा और रिकार्ड मांगा गया, सबकुछ साझा किया गया.
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट के उन टिप्पणियों को भी याद दिलाया, जिसमें कहा गया है कि तबादले का इस्तेमाल सजा के तौर पर नहीं हो सकता है।
उनके वकील ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए कहा कि डॉ अग्रवाल 31 मई को होने वाले दिल्ली मेडिकल काउंसिल के चुनावों की देखरेख कर रही थीं, और उन्हें अचानक हटाना बिना सोचे-समझे लिया गया फैसला और मनमानी को दर्शाता है. साथ-साथ यह भी तर्क दिया गया कि उन्हें कोई ठोस पद दिए बिना ही उनके पद से हटाना दिल्ली स्वास्थ्य सेवा की तबादला नीति का उल्लंघन था.
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