कुंदन कुमार, पटना। सीबीआई की टीम ने इनकम टैक्स (आयकर) विभाग में तैनात एक अधिकारी और उनके क्लर्क को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया है। यह कार्रवाई विभाग के भीतर चल रहे कथित भ्रष्टाचार और अवैध वसूली पर एक बड़ा प्रहार मानी जा रही है।
एनजीओ के सर्टिफिकेट के नाम पर हो रही थी अवैध डिमांड
यह पूरा मामला एक गैर-सरकारी संगठन यानी एनजीओ के कानूनी दस्तावेजों और प्रमाण पत्रों से जुड़ा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार, एनजीओ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले ’12ए’ और ’80जी’ सर्टिफिकेट को जारी करने और उससे संबंधित काउंसलिंग प्रक्रिया को पूरा कराने के एवज में रिश्वत की मांग की गई थी। कागजी कार्रवाई को आगे बढ़ाने के बदले में पैसों का सौदा तय हुआ था, जिसके बाद यह पूरा खेल उजागर हुआ।
एनजीओ संचालिका की सूझबूझ से बिछाया गया जाल
एनजीओ की संचालिका ज्योति मिश्रा ने इस पूरे प्रकरण में हिम्मत दिखाते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने इसकी गुप्त शिकायत सीधे केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई से की। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने बिना किसी देरी के मामले की गंभीरता को समझते हुए इसका अंदरूनी सत्यापन (सत्यापन प्रक्रिया) कराया। जब शुरुआती जांच में मामला सही पाया गया, तब सीबीआई ने जाल बिछाकर आरोपियों को पकड़ने की योजना बनाई।
कार्यालय के भीतर ही दबोचे गए दोनों आरोपी
सत्यापन के पुख्ता होने के बाद सीबीआई की विशेष टीम ने इनकम टैक्स विभाग के कार्यालय में अचानक धावा बोला। टीम ने सुनंदा कुमार और उनके सहयोगी क्लर्क को 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस औचक कार्रवाई से आयकर कार्यालय में हड़कंप मच गया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई की टीम दोनों आरोपियों को उनके दफ्तर से हिरासत में लेकर अपने साथ सुरक्षित स्थान पर रवाना हो गई।
आगे की पूछताछ और कानूनी शिकंजा
फिलहाल सीबीआई की टीम दोनों गिरफ्तार आरोपियों से मैराथन पूछताछ कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस भ्रष्टाचार के खेल में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और क्या पहले भी इस तरह से अवैध वसूली की गई है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से राज्य के अन्य सरकारी विभागों में भी हड़कंप मचा हुआ है, और यह घटना भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है।



