अजय सैनी, भिवानी. चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में परीक्षा परिणामों को लेकर उपजे विवाद के बीच एनएसयूआई ने विद्यार्थियों के हक में आवाज बुलंद कर दी है। विश्वविद्यालय द्वारा पासिंग क्राइटेरिया (उत्तीर्ण नियमों) में किए गए बदलावों के विरोध में एनएसयूआई जिला भिवानी के एक प्रतिनिधिमंडल ने परीक्षा नियंत्रक अधिकारी से मुलाकात की और विद्यार्थियों की गंभीर समस्याओं को लेकर एक महत्वपूर्ण मांग पत्र सौंपा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपना छात्र विरोधी रवैया नहीं बदला, तो छात्र सडक़ों पर उतरकर लोकतांत्रिक तरीके से बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।


एनएसयूआई ने मांग पत्र के माध्यम से विश्वविद्यालय में पूर्व में लागू संयुक्त उत्तीर्ण व्यवस्था को तुरंत प्रभाव से पुन: लागू करने की मांग उठाई है। एनएसयूआई ने मांग की कि सैद्धान्तिक परीक्षा, आंतरिक मूल्यांकन दोनों के अंकों को अलग-अलग देखने के बजाय संयुक्त रूप से जोडक़र कुल 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को उत्तीर्ण (पास) घोषित किया जाए।


मनजीत लांग्यान ने बताया कि वर्तमान में लागू तकनीकी और कड़े नियमों के कारण विश्वविद्यालय के हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है। अनेक मेहनती छात्र ऐसे हैं, जो थ्योरी और इंटरनल असेसमेंट मिलाकर कुल निर्धारित अंक तो पूरे कर रहे हैं, लेकिन केवल थ्योरी में कुछ अंकों की कमी रह जाने के कारण उन्हें अनुत्तीर्ण (फेल) घोषित किया जा रहा है।


एनएसयूआई जिला अध्यक्ष मंजीत लांगायन ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को विद्यार्थियों की जमीनी, मानसिक और शैक्षणिक परिस्थितियों को समझना होगा। आज इस अव्यावहारिक नियम के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी भारी तनाव और असुरक्षा के साए में जी रहे हैं। कई होनहार छात्र सिर्फ तकनीकी फेरबदल के कारण फेल हो रहे हैं, जिससे उनका पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद हो रहा है। उन्होंने साफ किया कि एनएसयूआई विद्यार्थियों के हर अधिकार और उनके भविष्य की रक्षा के लिए आखिरी दम तक संघर्ष करेगी।


छात्र नेता ऋतिक यादव ने विश्वविद्यालय के मूल सिद्धांतों पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को आगे बढ़ाना और उन्हें प्रोत्साहित करना होना चाहिए, न कि ऐसे जटिल नियम बनाकर उन्हें मानसिक रूप से निराश करना। जब एक छात्र कुल मिलाकर पासिंग मार्क्स ला रहा है, तो उसे केवल थ्योरी के कुछ अंकों के आधार पर फेल करना सरासर छात्र विरोधी निर्णय है। प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस नियम को वर्तमान परिणामों और आने वाली पुनर्परीक्षाओं (क्रद्ग-ड्डश्चश्चद्गड्डह्म्) में भी तुरंत लागू करना चाहिए।


छात्रा नेता अंकिता शर्मा ने छात्राओं की चिंताओं को सामने रखते हुए कहा कि बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं इस समय गंभीर मानसिक दबाव से गुजर रहे हैं। जो विद्यार्थी इंटरनल असेसमेंट और प्रैक्टिकल में अपनी मेहनत से अच्छे अंक लाते हैं, उन्हें महज एक भाग में थोड़ी कमी के कारण फेल कर देना उनके भविष्य के साथ सरासर अन्याय है। यूनिवर्सिटी को बिना देरी किए छात्र हित में सकारात्मक फैसला लेना चाहिए।


मांग पत्र सौंपने के बाद एनएसयूआई जिला भिवानी ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि यह विद्यार्थियों के भविष्य का सीधा सवाल है। यदि विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक और उच्च प्रशासन ने इस जायज मांग पर शीघ्र कोई सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया, तो संगठन विद्यार्थियों को साथ लेकर आगामी दिनों में बड़े स्तर पर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
मांग पत्र सौंपने के दौरान दिनेश कुमार, अमित, लोकेश, रेनू, रौनक, निशु, कामिनी, पूजा और अंकिता सहित भारी संख्या में छात्र और एनएसयूआई कार्यकर्ता मौजूद रहे।