कुंदन कुमार/ पटना। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए मैथिली भाषा को अपने पाठ्यक्रम में आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया है। अब कक्षा 1 से लेकर माध्यमिक स्तर तक के छात्र अपनी मातृभाषा मैथिली को एक विषय के रूप में पढ़ सकेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत लिए गए इस निर्णय का उद्देश्य भारतीय भाषाओं के संरक्षण और उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है।
ऐतिहासिक फैसला और सांस्कृतिक गौरव
मैथिली को भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में से एक होने का गौरव प्राप्त है। इस निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर इसे मिथिला की सांस्कृतिक अस्मिता के लिए एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों को उनकी जड़ों, परंपराओं और भाषाई गौरव से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम साबित होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं के संवर्धन की दिशा में यह एक युगांतरकारी प्रयास है।

शिक्षा मंत्रालय और जनप्रतिनिधियों की पहल
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर को पत्र भेजकर आधिकारिक रूप से इस निर्णय की जानकारी साझा की। सांसद गोपाल जी ठाकुर ने इस उपलब्धि को मिथिलांचल के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा में मातृभाषा की भूमिका अनिवार्य है और इस कदम से विद्यार्थियों को अपनी भाषा में सीखने के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। यह कदम स्थानीय भाषा के प्रति न केवल सम्मान बढ़ाएगा, बल्कि अकादमिक स्तर पर इसके विस्तार का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।
बिहार विधानसभा अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने इस उपलब्धि पर विश्वभर के मैथिली भाषियों और शिक्षाविदों को बधाई दी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि मैथिली केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मिथिला की समृद्ध संस्कृति और जीवंत विरासत की संवाहक है। सीबीएसई के इस निर्णय से भाषाई गौरव को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलेगी।
शिक्षा प्रणाली में नई दिशा
सीबीएसई द्वारा मैथिली को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है। यह न केवल छात्रों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार देता है, बल्कि लंबे समय से की जा रही मैथिली भाषियों की मांग को भी पूरा करता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय छात्रों में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना को और अधिक प्रगाढ़ करेगा।
आने वाले समय में, यह पाठ्यक्रम मैथिली भाषा के साहित्य, व्याकरण और सांस्कृतिक पहलुओं को व्यापक रूप से प्रसारित करने में मदद करेगा, जिससे मिथिला की यह प्राचीन भाषा नई पीढ़ी के बीच और अधिक लोकप्रिय और सशक्त बनेगी।

